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Agniveer: अग्निवीर की शहादत पर राहुल बोले- पेंशन तक नहीं, ये नायकों का अपमान, खरगे ने भी सरकार पर साधा निशाना

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 23 Oct 2023 05:04 PM IST

सार

मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा, चुनाव में सेना का राजनीतिक इस्तेमाल करके मोदी सरकार ने वो किया है, जो 75 सालों में कभी नहीं हुआ है। मोदी सरकार ने, सेना को देशभर में 822 ऐसे सेल्फी प्वाइंट लगाने को कहा है, जो सरकारी योजनाओं का प्रचार करें। इन झांकियों में सैनिकों के पराक्रम की गाथा के बजाय प्रधानमंत्री मोदी जी बुतनुमा तस्वीर है और उनकी योजनाओं का गुणगान है...
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Agniveer: Rahul Gandhi - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar


न ग्रेच्युटी और न ही परिवार को पेंशन

राहुल गांधी ने अपने ट्वीट पर अग्निवीर गवाते का फोटो शेयर करते हुए कहा, 'सियाचिन में, अग्निवीर गवाते अक्षय लक्ष्मण की शहादत का समाचार बहुत दुखद है। उनके परिवार को मेरी गहरी संवेदनाएं। एक युवा देश के लिए शहीद हो गया। सेवा के समय न ग्रेच्युटी न अन्य सैन्य सुविधाएं और शहादत में परिवार को पेंशन तक नहीं। अग्निवीर, भारत के वीरों के अपमान की योजना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सेना के राजनीतिकरण को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा। उन्होंने मोदी सरकार पर आईएएस अफसरों और सैन्य बलों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया। खरगे ने लिखा, मोदी सरकार के लिए सरकार की सभी एजेंसियां, संस्थान, हथियार, विंग और विभाग अब आधिकारिक तौर पर 'प्रचारक' हैं। केंद्र की भाजपा सरकार ने पिछले नौ वर्षों की उपलब्धियों का जश्न मनाने के नाम पर नौकरशाही और सशस्त्र बलों का राजनीतिकरण किया है। लोकतंत्र और हमारे संविधान की रक्षा के मद्देनजर, यह जरूरी है कि उन आदेशों को तुरंत वापस लिया जाए, जो नौकरशाही और हमारे सशस्त्र बलों के राजनीतिकरण को बढ़ावा देंगे।

अग्निवीर की शहादत पर मिलती है इतनी राशि

सोशल मीडिया पर अग्निवीर की शहादत को लेकर जब केंद्र सरकार को घेरा जाने लगा, तो सेना की तरफ से कहा गया कि शहीद गवाटे के परिजनों को मुआवजे में 48 लाख रुपये की इंश्योरेंस राशि, 44 लाख रुपये का अनुग्रह भुगतान (एक्सग्रेशिया) और अग्निवीर से सेवा निधि योगदान (30%) व अर्जित ब्याज के साथ सरकार द्वारा एक समान योगदान शामिल है। इसमें सैनिक के निधन की तारीख से चार साल पूरे होने तक शेष कार्यकाल के लिए उसका वेतन भी शामिल है। वर्तमान मामले में यह राशि 13 लाख रुपये से अधिक है। सशस्त्र बल युद्ध कोष से 8 लाख रुपये का अतिरिक्त योगदान, परिजनों को दिया जाएगा। तत्काल राहत प्रदान करने के लिए आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा 30 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है।

खरगे का आरोप, मोदी जी स्वयं का प्रचार करा रहें हैं

गत सप्ताह अपने ट्वीट में मल्लिकार्जुन खरगे ने सेल्फी प्वाइंट को लेकर कई तस्वीरें टैग की थीं। एक सेल्फी प्वाइंट पर लिखा था, 'मिली कष्टों से मुक्ति, हर घर जल की शक्ति', ये है नया भारत। दूसरी सेल्फी साइट पर लिखा है, 'स्किल विल', दिस इज न्यू इंडिया। तीसरी सेल्फी साइट पर, 'धुएं से मुक्ति-उज्जवला की शक्ति' और चौथी साइट पर लिखा है 'फोर्स फॉर ग्लोबल गुड'। इन सभी योजनाओं की सेल्फी साइट पर पीएम मोदी का फोटो लगा है। मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा, चुनाव में सेना का राजनीतिक इस्तेमाल करके मोदी सरकार ने वो किया है, जो 75 सालों में कभी नहीं हुआ है। मोदी सरकार ने, सेना को देशभर में 822 ऐसे सेल्फी प्वाइंट लगाने को कहा है, जो सरकारी योजनाओं का प्रचार करें। इन झांकियों में सैनिकों के पराक्रम की गाथा के बजाय प्रधानमंत्री मोदी जी बुतनुमा तस्वीर है और उनकी योजनाओं का गुणगान है। भारतीय सेना के शौर्य एवं बलिदान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को बेहद गर्व है। मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा, राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा ने भारतीय सेना की गरिमा को चोट पहुंचाई है।

सेना, देश की आंतरिक राजनीति का हिस्सा नहीं

कांग्रेस पार्टी के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा था, हमारी बहादुर सेना, कभी भी देश की आंतरिक राजनीति का हिस्सा नहीं बनी। महंगाई, बेरोजगारी और दूसरे कई मोर्चों पर विफलता का सामना करने के बाद मोदी सरकार अब सेना से अपना राजनीतिक प्रचार पाने का बहुत घटिया प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार, अपनी कई अहम योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए सैन्य संगठनों की मदद लेने जा रही है। नारी सशक्तिकरण और उज्जवला जैसी कई योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए विभिन्न शहरों में सेल्फी प्वाइंट बनाने की बात कही जा रही है। करीब आठ सौ से अधिक सेल्फी प्वाइंट में से भारतीय सेना के हिस्से सौ प्वाइंट आए हैं। एयरफोर्स के हिस्से 75, नेवी के लिए 75, बीआरओ के हिस्से में 50, डीआरडीओ के लिए 50 और सैनिक स्कूलों के लिए 50 स्थान तय किए गए हैं। अन्य रक्षा संगठनों में भी ऐसी ही चार सौ से अधिक जगह सुनिश्चित की गई हैं। बतौर जयराम, सरकार अपने प्रचार के लिए सेना का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

खरगे बोले, 'सैनिक-राजदूत' बनाया गया

खरगे ने पीएम को लिखे अपने पत्र में कहा, मैं 9 अक्तूबर, 2023 को रक्षा मंत्रालय द्वारा पारित एक आदेश का उल्लेख करता हूं, जिसमें वार्षिक छुट्टी पर सैनिकों को सरकारी योजनाओं को बढ़ावा देने में समय बिताने का निर्देश दिया गया था। उन्हें 'सैनिक-राजदूत' दिया गया। सेना प्रशिक्षण कमान, जिसे राष्ट्र की रक्षा के लिए हमारे जवानों को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, वह सरकारी योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए स्क्रिप्ट और प्रशिक्षण नियमावली तैयार करने में व्यस्त है। लोकतंत्र में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि सशस्त्र बलों को राजनीति से बाहर रखा जाए। प्रत्येक जवान की निष्ठा राष्ट्र और संविधान के प्रति है। हमारे सैनिकों को सरकारी योजनाओं के विपणन एजेंट बनने के लिए मजबूर करना सशस्त्र बलों के राजनीतिकरण की दिशा में एक खतरनाक कदम है। इसके अलावा, हमारे राष्ट्र की कई महीनों या वर्षों की कठिन सेवा के बाद, हमारे जवान अपने वार्षिक अवकाश पर पूर्ण स्वतंत्रता के हकदार हैं। अपने परिवारों के साथ समय बिताने और निरंतर सेवा के लिए ऊर्जा बहाल करने के लिए, वह छुट्टी जरुरी है। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उनकी छुट्टियों का अपहरण नहीं किया जाना चाहिए।

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