भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने स्थायी विधि आयोग के गठन की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए कानूनी सुधार हो सकेंगे। संविधान दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट के सभागार में आयोजित समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें कानूनी सुधारों के लिए एक स्थायी विधि आयोग की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा पारिवारिक अदालतों में अपीलों का बोझ कम करने की जरूरत है। साथ ही संपत्ति कानून और अन्य मामलों में निपटान आयोग की आवश्यकता है।
एजी आर वेंकटरमणी ने अपने संबोधन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का छोटे कॉसल कोर्ट में तब्दील होना बंद होना चाहिए। अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार हाईकोर्ट में मामलों के निर्बाध और विशाल प्रवाह के साथ-साथ अंतहीन वैधानिक अपीलों के साथ अदालतों को ओवरलोड करना बंद करे।
अपने संबोधन के आखिर में उन्होंने कहा कि देश की कानून बिरादरी से जुड़े लोगों को उस दिन का इंतजार करना चाहिए जब देश की जेलें युवाओं से खाली हों और उनकी आत्मा परिवर्तन की ओर देखे। एजी ने कहा कि कानून के शासन के परिणामस्वरूप हिंसा में कमी आई है।
इससे पहले सीजेआई चंद्रचूड़ ने अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि सभी को न्याय सुलभ होना चाहिए। हमारी अदालतों से जो न्यायशास्त्र निकला है, उसने दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में फैसलों को प्रभावित किया है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली के तिलक मार्ग पर स्थित है, लेकिन अब वर्चुअल तरीकों से वकीलों के लिए कहीं से भी मामले में बहस करना संभव हो गया है। मामलों को सूचीबद्ध करने के लिए अब प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की जरूरत है।
पं. नेहरू को किया याद
चंद्रचूड़ ने इस मौके पर देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू को भी याद किया। आजादी के मौके पर पं. नेहरू के संबोधन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत हमसे अभी भी कुछ हद तक जुड़ा हुआ है। हमें वादों को पूरा करने के लिए काफी कुछ करना है। आजादी के पहले हाशिए पर खड़े लोगों के संघर्ष को बयां करते हुए कहा कि संविधान की नींव सबसे पहले उन्होंने ही रखी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर के एक कथन को याद किया। इसमें उन्होंने कहा था कि ब्रह्मांड की चक्र लंबा है, लेकिन यह न्याय के आगे झुक जाता है।