भर्ती के संकट से जूझ रहे आतंकी संगठन
पिछले साल पांच अप्रैल को केरन सेक्टर में आतंकियों के खिलाफ एक ऑपरेशन में स्पेशल फोर्सेज के पांच जवान शहीद हो गए थे। मई 2020 में सेना के कर्नल सहित चार जवान हंदवाड़ा में शहीद हुए थे, जबकि माछिल सेक्टर में भी अगस्त 2020 में एक कैप्टन सहित चार जवान शहीद हो गए थे। सोमवार को सुरनकोट में एक जेसीओ सहित पांच जवानों की शहादत हुई है। ये सभी ऑपरेशन पहाड़, जंगल या बर्फ में हुए थे। सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर बताते हैं, ऐसा नहीं कहा जा सकता कि जंगल या पहाड़ पर जवानों से कोई चूक हुई है। वे मैदानी इलाके में अच्छा करते हैं। ये बात सही नहीं है। घुसपैठ किस इलाके से हो रही है, कई बार इसका ठीक अंदाजा नहीं हो पाता। पेट्रोलिंग के दौरान अचानक घात लगा कर हमला हो जाए, ये ऑपरेशन की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
कई बार ऐसा होता है कि आतंकी ज्यादा ऊंचाई पर रहते हैं। उन्हें 'चपेट में आने वाले' प्वाइंट कहा जाता है। रिज के आसपास पहचान छिप जाती है। दिन में धूप और रात को अंधेरे में कुछ नहीं दिखाई पड़ता। ये परेशानी कुछ ही जगहों पर आती हैं। ऐसी स्थिति में आतंकी 'हाइट और हाइड', दोनों का फायदा उठाते हैं। जब उन्हें शेल्टर मिल जाता है तो वे मौका देखकर सुरक्षा बलों के दस्ते पर घात लगाकर हमला कर देते हैं। भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह से मुस्तैद हैं। ये दांव की बात है, कभी आतंकी इसका लाभ उठा लेते हैं। पिछले साल दो सौ से अधिक आतंकी मारे गए थे। इस बार भी मारे जा रहे हैं। अब तो नई भर्ती के लिए युवक ही नहीं मिल रहे। आतंकी संगठन भर्ती के संकट से जूझ रहे हैं।
बतौर कैप्टन गौर, पाकिस्तानी फौज के लिए कश्मीर पैसा कमाने का जरिया है। सेना के कई अफसर कश्मीर के नाम पर ग्रांट जारी कराते हैं। इससे वे कुछ पैसा आतंकवाद पर लगाते हैं और बाकी का खुद रखते हैं। कश्मीर और आतंक, ये दोनों मुद्दे सेना के हवाले हैं। प्रधानमंत्री इमरान खान की कुर्सी तभी तक सुरक्षित है, जब तक उन्हें सेना प्रमुख बाजवा का साथ मिला हुआ है। अपनी कुर्सी बचाने के लिए यानी चुनावी एजेंडे के तौर पर सेना की मदद से इमरान खान, कश्मीर में अशांति फैलाते हैं। वे जानते हैं कि कर्ज में सिर तक डूब चुके पाकिस्तान की सत्ता पर दोबारा से कब्जा करना है, तो उसके लिए कश्मीर में आतंकी गतिविधियां तेज करनी होंगी। बाकी कश्मीर घाटी में इस बार एनआईए व दूसरी एजेंसियां जिस रास्ते पर आगे बढ़ रही हैं, उससे आतंकियों का स्पोर्ट सिस्टम खत्म हो जाएगा।