पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रामनवमी के मौके पर हुई हिंसा के बाद जिंदगी पटरी पर लौट रही है लेकिन तनाव अब भी बरकरार है। रानीगंज और आसनसोल में दोनों समुदायों के लोगों ने अपनी दुकानों को फिर से खोल लिया है। सभी उन्हीं दुकानों से सामान खरीद रहे हैं जहां दंगे होने से पहले खरीदा करते थे। शनिवार को हनुमान जयंती के मौके पर प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए अलर्ट पर था। निषेधाज्ञा के बावजूद, हनुमान जयंती की रैली निकालने के लिए आसनसोल और रानीगंज कस्बों के किनारे स्थित क्षेत्रों में अनुमति दे दी गई थी।
हिंसा के बाद आसनसोल के मेन बाजार की ज्यादातर दुकानों को दोबारा खोल दिया गया है। वहीं कुछ दुकानों के शटर अब भी बंद हैं। आसनसोल बस एसोसिएशन के सचिव प्रकाश चंद्र मंडल ने कहा- ड्राइवर और हेल्पर अभी भी डरे हुए हैं लेकिन उन्होंने काम पर आना शुरू कर दिया है। हमने सभी रूटों पर अपनी सेवा फिर से शुरू कर दी है। जहां आसनसोल के रहने वाले लोग घर से बाहर निकलकर बस में बैठ रहे हैं वहीं दूसरे जिलों से आने वाले लोग जो आमतौर पर काम के सिलसिले में रोजाना आया करते थे वह नहीं आ रहे हैं।
हालांकि प्रशासन ने एहतियातन हिंसा का शिकार हुए क्षेत्रों में निषेधाज्ञा बरकरार रखने के साथ ही
इंटरनेट सेवाएं निलंबित की हुई हैं। एसडीओ पी रॉय चौधरी ने बताया कि आसनसोल के दक्षिणी हिस्सों में दुकानें और बाजार खुले रहे और गाड़ियों की आवाजाही शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि शहर के उत्तरी हिस्सों में अब भी तनाव बना हुआ है। चौधरी के अनुसार हिंसा की कोई नई घटना नहीं हुई है लेकिन निषेधाज्ञा बरकरार है। इंटरनेट सेवाएं चार अप्रैल तक निलंबित रहेंगी।
भाजपा के प्रदेश महासचिव सयनतन बासु का इस मामले पर कहना है कि पार्टी नेताओं का एक दल रानीगंज और आसनसोल का दौरा करेगा जहां हाल में रामनवमी के जुलूसों को लेकर दो गुटों में झड़प हुई थी। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि दल हालत का जायजा लेने के लिए प्रभावित इलाकों का दौरा करेगा। जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।