सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित मोर्चे में शामिल होने वाले दलों को लेकर फारूक और राव के नजरिए में मतभेद हैं। अब्दुल्ला को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को साथ लेने में कोई दिक्कत नहीं है, वहीं राव कांग्रेस से भी दूरी बना कर आगे बढ़ने के पक्षधर हैं।
ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस समेत तमाम क्षेत्रीय दलों को साथ लेना चाहती हैं। लेकिन वे प्रस्तावित गठजोड़ के नेता के तौर पर राहुल गांधी को स्वीकार करने में हिचक रही हैं। उनकी सोच यह है कि राहुल के सामने आने पर कुछ क्षेत्रीय दल प्रस्तावित गठजोड़ से दूर हो सकते हैं।
फारूक अब्दुल्ला ने यहां ममता से मुलाकात के बाद कहा कि देश को एक नई सरकार की जरूरत है जो सहिष्णु हो। देश गलत दिशा में जा रहा है। इसलिए वे ममता से मुलाकात करने यहां आए हैं, ताकि राष्ट्र को बचाने के लिए एक ताकत का गठन किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत से साबित हो गया है कि राहुल अब एक परिपक्व नेता बन चुके हैं।
कांग्रेस नेता और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सलमान खुर्शीद ने कहा है कि यूपी में विपक्षी दलों का कोई भी गठबंधन कांग्रेस के बिना कमजोर ही होगा। खुर्शीद ने यह टिप्पणी उन खबरों के परिप्रेक्ष्य में की है कि बसपा और सपा आगामी चुनावों में गैर भाजपा विपक्षी दलों के गठबंधन से कांग्रेस को दूर रख सकती हैं।