नहीं बचा मीरवाइज में दमखम
कश्मीर मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि घाटी में अलगाववादी आंदोलन एक तरह से वेंटिलेटर पर ही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर और यासीन मलिक जरूर इस आंदोलन को हवा दे सकते हैं, लेकिन मीरवाइज में अब वह दमखम नहीं बचा। केंद्रीय जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया बीते कुछ समय से चल रही केंद्र सरकार की कई एजेंसियों की जांच में मीरवाइज पूरी तरीके से टूट चुका है। यही वजह है कि वह गिलानी के बाद अलगाववाद के आंदोलन को घाटी में जिंदा नहीं रख सकता है। दूसरा नाम घाटी में अलगाववाद के आंदोलन को आगे बढ़ाने वाला यासीन मलिक है।
कश्मीर मामले के विशेषज्ञों का कहना है कि यासीन मलिक भी अब किसी भी तरीके के बड़े आंदोलन को हवा नहीं दे सकता। हालांकि घाटी में कम हो रहे अलगाववाद के आंदोलन को ध्यान में रखते हुए मीरवाइज और यासीन मलिक के साथ मिलकर सैयद अली शाह गिलानी ने 2016 में 'जॉइंट रजिस्टेंस लीडरशिप' (जेआरएल) नाम से एक संगठन की शुरुआत की थी। ताकि अलगाववाद का आंदोलन जिंदा रहे। इस संगठन का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन घाटी में बुरहान वानी की मौत के बाद एक बार पनपा, लेकिन सैन्य बलों ने उस आंदोलन को पूरी तरीके से कुचल कर रख दिया। सूत्र बताते हैं कि इस आंदोलन के कुचलने के बाद ही पूरी तरीके से जेआरएल की कार्यप्रणाली खुले तौर पर सामने नहीं आ पाई।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर के डाउनटाउन इलाके में अभी भी कट्टरपंथियों का एक बड़ा संगठन आंदोलित तो जरूर है लेकिन वह पूर्ण रुप से जमीन पर नहीं उतर पा रहा है। दरअसल इन कट्टरपंथियों में आईएसआई से लेकर पीओके में मौजूद आतंकवादी संगठनों के कई कमांडर और उनमें भरोसा करने वाले नौजवान और युवा भी हैं। लेकिन भारतीय सैन्य शक्ति और खुफिया एजेंसियों समेत केंद्रीय सुरक्षाबलों और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता से यह कट्टरपंथी घाटी में अपना सिर नहीं उठा पा रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर सुलग जरूर रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि रविवार को जिस तरीके से अलगाववादी नेता यासीन मलिक के पुराने मामलों में सीबीआई ने गवाहों के क्रॉस एग्जामिन करने की शुरुआत की है, वह अलगाववादी नेताओं के लिए या कश्मीर में आंदोलन के माध्यम से युवाओं को भड़काने वाले नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है। जेकेएलएफ के आतंकवादी यासीन मलिक के इंडियन एयरफोर्स के चार जवानों की गोली मारकर हत्या करने और रुबिका सईद के अपहरण के मामले में गवाहों का क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू हो चुका है। विशेषज्ञों का कहना है यासीन मलिक के ऊपर जल्द शिकंजा कसना शुरू होगा।