उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को संगठन की कमान देने के बाद भाजपा नेतृत्व को अब मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए किसी ब्राह्मण चेहरे की तलाश है। विधानसभा चुनाव में अगड़ा, पिछड़ा और दलितों को एक साथ साधने की रणनीति के तहत किसी दलित चेहरे को भी महत्वपूर्ण पद देने पर माथापच्ची शुरू हो गई है।
इस कड़ी में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और चुनाव अभियान समिति के मुखिया का पद शामिल है। दरअसल भाजपा के रणनीतिकार लोकसभा चुनाव में मिले गैर-यादव पिछड़ी जाति, अगड़ी जाति और गैर-जाटव दलित बिरादरी के वोट को हर हाल में अपने साथ बनाए रखना चाहती है।
इसी रणनीति के तहत इसकी पहली कड़ी में शुक्रवार को अति पिछड़ा वर्ग के सांसद केशव प्रसाद मौर्य को राज्य के संगठन की कमान दी गई।
राज्य की चुनावी रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, विधानसभा चुनाव जीतने के लिए ब्राह्मण बिरादरी को साधे रखने की सबसे अधिक जरूरत है।