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यूपी में पिछड़ा अध्यक्ष के बाद अब भाजपा को अगड़े चेहरे की तलाश

Mon, 11 Apr 2016 01:57 AM IST
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला,नई दिल्ली

सार

  •  सीएम पद के उम्मीदवार के लिए भाजपा में शुरू हुई ब्राह्मण चेहरे की तलाश
  • दलित वर्ग को भी महत्वपूर्ण पद देने की तैयारी
  • उत्तर प्रदेश में भाजपा की अगड़ा, गैर यादव पिछड़ा और गैर जाटव दलित को एक साथ साधने की तैयारी
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को संगठन की कमान देने के बाद भाजपा नेतृत्व को अब मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए किसी ब्राह्मण चेहरे की तलाश है। विधानसभा चुनाव में अगड़ा, पिछड़ा और दलितों को एक साथ साधने की रणनीति के तहत किसी दलित चेहरे को भी महत्वपूर्ण पद देने पर माथापच्ची शुरू हो गई है।
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इस कड़ी में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और चुनाव अभियान समिति के मुखिया का पद शामिल है। दरअसल भाजपा के रणनीतिकार लोकसभा चुनाव में मिले गैर-यादव पिछड़ी जाति, अगड़ी जाति और गैर-जाटव दलित बिरादरी के वोट को हर हाल में अपने साथ बनाए रखना चाहती है।

इसी रणनीति के तहत इसकी पहली कड़ी में शुक्रवार को अति पिछड़ा वर्ग के सांसद केशव प्रसाद मौर्य को राज्य के संगठन की कमान दी गई।

राज्य की चुनावी रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, विधानसभा चुनाव जीतने के लिए ब्राह्मण बिरादरी को साधे रखने की सबसे अधिक जरूरत है।
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गुंजाइश को साफ तौर पर खत्म करना चाहती भाजपा

पार्टी को डर है कि अगर सकारात्मक संदेश नहीं दिया गया तो बसपा को मिल रही बढ़त संबंधी अटकलों के प्रभाव में यह बिरादरी फिर से बसपा से जुड़ने से गुरेज नहीं करेगी। यही कारण है कि रणनीतिकारों ने सीधे मुख्यमंत्री पद या चुनाव अभियान समिति की कमान इस बिरादरी को देकर आने वाले खतरे की गुंजाइश को साफ तौर पर खत्म करना चाहती है।

चूंकि पार्टी को लोकसभा चुनाव में बसपा प्रमुख मायावती की स्वजातीय वोटों के इतर अन्य दलित बिरादरी का भी ठीक ठाक वोट मिला था। यही कारण है कि रणनीतिकार गैरजाटव दलित बिरादरी से जुड़े किसी दलित नेता को भी अहम पद देने की तैयारी कर रही है।

बहरहाल अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है कि गैर-जाटव दलित बिरादरी को साधने के लिए इन्हें कौन सा पद दिया जाए। गौरतलब है कि अध्यक्ष पद के लिए अगड़ा वर्ग से पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, पर्यटन राज्य मंत्री महेश शर्मा, रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के अलावा दलित बिरादरी के रामशंकर कठेरिया के नाम पर भी पार्टी नेतृत्व ने विचार विमर्श किया था।
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