बिहार में सांप्रदायिक दंगे बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से बिहार के कई शहर दंगे की आग में झुलस रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के साथ नीतीश कुमार की शुरू की गई पारी के बाद राज्य में करीब सांप्रदायिक तनाव की 200 घटनाएं हो चुकी हैं।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2018 के महज तीन महीनों में 64 घटनाएं हो चुकी हैं। ये खुलासा अंग्रेजी अखबार ने दंगों के सरकारी आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद किया है। नीतीश कुमार ने पिछले साल जुलाई में लालू यादव की आरजेडी से रिश्ता खत्म कर बीजेपी का दामन थामा था और NDA में घरवापसी की थी।
अगर बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की बात करें तो पिछले पांच साल में यह सिलसिलेवार तरीके से बढ़ी है। 2012 में 50 बार, 2013 में 112 बार हिंसा हुई थी जबकि 2014 में यह 110 बार, 2015 में ये आंकड़ा बढ़कर 155 हो गया था।
2016 में ऐसे दंगों में बढ़ोतरी हुई और साम्प्रदायिक दंगों की घटनाएं बढ़कर 230 हुईं जबकि 2017 में धार्मिक टकराव की 270 घटनाएं प्रदेश में घटी। बता दें कि 2017 में नीतीश कुमार जुलाई तक आरजेडी के साथ थे और इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन पकड़ कर सत्ता संभाली थी।
3 महीनों में ही सांप्रदायिक दंगों के 64 मामले सामने आए हैं
वहीं इस साल महज 3 महीनों में ही सांप्रदायिक दंगों के 64 मामले सामने आए हैं। जिसमें जनवरी में 21 दंगे हुए जबकि फरवरी में 13 और मार्च में 30 दंगे पुलिस की डायरी में दर्ज हैं। इस साल अररिया लोकसभा उपचुनाव में आरजेडी की जीत के बाद एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मुस्लिम युवकों ने देश विरोधी नारे लगाते हुए देखे गए थे इसके बाद वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया था।
इस घटना के महज कुछ दिन बाद ही बिहार के कई शहरों में रामनवमी का जुलूस निकाला गया जिसमें भागलपुर, मुंगेर, औरंगाबाद, समस्तीपुर, शेखपुरा, नवादा और नालंदा में सांप्रदायिक दंगे फैले। बिहार में दंगे बढ़ने की बात पर बिहार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अभी बहुत जल्दबाजी है यह कहना कि यहां सांप्रदायिक घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। वहीं बिहार में बढ़ते सांप्रदायिक दंगों का राजनीतिकरण भी तेजी से किया गया है।
वहीं, बीजेपी ने भी हिंसा में हुई बढ़ोतरी को स्वीकार किया है। बीजेपी प्रवक्ता राजीव रंजन का कहना है कि इस बार रामनवमी में ज्यादा लोगों की मौजूदगी थी, लेकिन पुलिस को हिंसा भड़काने में आरजेडी के रोल की भी जांच करनी चाहिए। पुलिस ने पहले ही कुछ जगहों पर आरजेडी और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। जहां तक हिंसा की बढ़ोतरी की बात है तो अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।