बिरसा मुंडा 116 साल पहले दुनिया को अलविदा कह गए थे। जीते-जी उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। यही कारण है कि झारखंड की एक पहचान बिरसा मुंडा भी हैं। वह देश के नायकों में एक हैं, लेकिन आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि आजादी के इतने दशक बीतने के बाद भी बिरसा मुंडा की प्रतिमाएं बेड़ियों से जकड़ी हुई हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को एलान किया कि राज्य में बिरसा मुंडा की जितनी भी प्रतिमाएं लगी हैं, उन्हें बेड़ियों से मुक्त किया जाए।
रघुवर दास ने कहा, 'जंजीरों से जकड़ी बिरसा मुंडा की प्रतिमा युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।'
झारखंड में आर्ट एंड कल्चर के डायरेक्टर अनिल कुमार सिंह ने कहा, 'इस मुद्दे को लेकर उच्च स्तर पर कुछ समय तक विचार किया गया। इसके बाद विचार निकलकर आया कि जंजीरों में जकड़े बिरसा मुंडा की प्रतिमा यह बताती है कि हम उन्हें ब्रिटिश कैदी के तौर पर स्वीकार कर लिया है।'
अनिल सिंह ने कहा कि अब जिम्मेदारी विभागों पर है, जिन्हें जल्द से जल्द बिरसा मुंडा क तस्वीरें और प्रतिमाओं को बदलना है। बिरसा मुंडा ने 9 जून 1900 को आखिरी सांस ली थी।