अफगानिस्तान पर कब्जे के लिए तालिबान द्वारा की जा रही हिंसा को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने परोक्ष रूप से निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में सामूहिक हिंसा, क्रूर धमकी या गुप्त एजेंडा के जरिए वैधानिकता हासिल नहीं की जा सकती है। बता दें, अमेरिका द्वारा अपने सैनिक वापस बुलाने के बाद तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता पर कब्जे के लिए हिंसा पर उतारू हो गया है।
एक ऑनलाइन कार्यक्रम में जयशंकर ने आतंकवाद के लिए स्पष्ट, समन्वित और भेदभाव रहित होकर कार्रवाई करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की नर्सरी संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में ही स्थित है।
विदेश मंत्री ने कहा कि आज हम अफगानिस्तान में जो हालात देख रहे हैं और वहां के लोगों पर जिस तरह से युद्ध थोपा जा रहा है, उसने चुनौती बढ़ा दी है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया तो इसकी धार और तेज हो जाएगी। यह केवल न केवल अफगानिस्तान के पड़ोस में बल्कि उससे भी आगे तक होगा।
जयशंकर ने कहा कि ऐसे में सभी हितधारकों को चुनौतियों से निपटने पर ध्यान देने की जरूरत है। 21वीं सदी में वैधता सामूहिक हिंसा, क्रूर धमकी या गुप्त एजेंडा से प्राप्त नहीं की जा सकती। प्रतिनिधित्व, समावेश, शांति और स्थिरता का अटूट संबंध है। जयशंकर ने कहा कि भारत राष्ट्रीय शांति और सुलह प्रक्रिया का समर्थन करता रहा है जो अफगान-नेतृत्व वाली, अफगान-स्वामित्व वाली और अफगान-नियंत्रित है।
बता दें, अमेरिका द्वारा अपने सैनिकों को वापस बुलाने के बाद से तालिबान व्यापक हिंसा का सहारा लेकर पूरे अफगानिस्तान में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अमेरिका 31 अगस्त तक अफगानिस्तान को पूरी तरह छोड़ना चाहता है। भारत अफगानिस्तान की शांति और स्थिरता में प्रमुख भागीदार रहा है। वहां सहायता और पुनर्निर्माण गतिविधियों में लगभग तीन अरब डॉलर का निवेश कर चुका है। भारत अफगानिस्तान के सभी वर्गों व सभी दलों के साथ मिलकर वहां के लोगों, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय भी शामिल हैं, की आकांक्षाओं को पूरा करने व उन्हें समृद्ध व सुरक्षित बनाने पर जोर देता रहा है।