विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि अफगानिस्तान नाजुक व चुनौतीपूर्ण हालात से गुजर रहा है। निकट का पड़ोसी देश होने के कारण भारत वहां के हालात पर लगातार नजर रखे हुए है। अफगानिस्तान के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक व सुरक्षा हालातों व मानवीय जरूरतों में बड़े बदलाव हुए हैं।
कुछ देशों का समूह ही न करे फैसले : जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, अफगानिस्तान को दी जाने वाली सहायता समाज के सभी वर्गों तक बिना भेदभाव के पहुंचना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ देशों के समूह के बजाय आम सहमति के लिए बहुपक्षीय मंच बेहतर और प्रभावी साबित होंगे। अफगानिस्तान को मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र की वर्चुअल दानसभा में जयशंकर ने कहा कि भारत ने युद्ध से पीड़ित अफगानिस्तान में यूएन की केंद्रीय भूमिका का हमेशा समर्थन किया है।
भारत की मैत्री अफगान जनता से है, जो जारी रहेगी। उन्होंने अफगानिस्तान को दी मदद के बारे में बताया, भारत ने दस लाख मीट्रिक टन गेहूं बीते एक दशक में अफगानिस्तान में भेजा है। पिछले वर्ष ही भारत ने 75,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजा था। साथ ही करीब तीन अरब डॉलर की विकास परियोजनाएं भी हमारी दोस्ती की गवाह हैं।
अफगानिस्तान के लिए दुनिया से मिले एक अरब डॉलर
संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को सभा करके अफगानिस्तान के लिए आपातकालीन फंड के तौर पर दुनिया के दानदाताओं से 60.6 करोड़ डॉलर मांगे। इस अपील के बदले सभा में करीब एक अरब डॉलर जुट गए। अमेरिका ने छह करोड़ 40 लाख डॉलर, नॉर्वे ने एक करोड़ 15 लाख डॉलर दान दिए हैं।
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के कार्यकारी निदेशक डेविड बेस्ले के मुताबिक, एक करोड़ 40 लाख लोग भूखे मरने के कगार पर हैं। फंड में से बड़ा हिस्सा वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के अभियानों के लिए जाएगा, ताकि लोगों की भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके। प्रोग्राम ने बताया कि अफगानिस्तान में गेहूं की 40 फीसदी फसल बर्बाद हो चुकी है। खाने-पीने के सामानों की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। लोगों के पास राशन खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।
तालिबान को नहीं देना चाहते दान
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने दानसभा की शुरुआत में कहा, मौजूदा अस्थिरता और सूखे के दौर को देखकर बड़े देश अफगानों की मदद करना चाहते हैं, लेकिन वे लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने वाले तालिबान को धन या संसाधन नहीं देना चाहते। गुटेरस ने कहा इस माह के आखिर तक अनाज खत्म होने की आशंका है।