भाजपा के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी के सहयोगी रहे विश्वंभर श्रीवास्तव की किताब ‘आडवाणी के साथ 32 साल’ का विमोचन शुक्रवार को हुआ। इस किताब में आपातकाल, बाबरी मस्जिद विध्वंस सहित तमाम राजनीतिक घटनाओं के दौरान आडवाणी के द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र है।
किताब का विमोचन भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के निदेशक रामबहादुर राय और गोविंदाचार्य ने किया। किताब तब चर्चा में आई जब बृहस्पतिवार को आडवाणी के सचिव दीपक चोपड़ा ने बयान जारी कर कहा कि इस किताब को आडवाणी की इच्छा के विरुद्घ छापा गया है।
हालांकि, लेखक ने दावा किया कि किताब पर आडवाणी की सहमति ली गई थी। गौरतलब है कि चोपड़ा के बयान के बाद विमोचन स्थल को बदल दिया गया। लेखक ने कहा कि जब उन्हें चोपड़ा की ओर से जारी बयान की जानकारी मिली तो वह हैरान रह गए।
क्योंकि उन्होंने न सिर्फ किताब की पांडुलिपि आडवाणी को भेजी थी, बल्कि इसमें उनकी इच्छा के अनुरूप परिवर्तन भी किए थे। उन्होंने दावा किया कि आपत्ति आडवाणी की ओर से नहीं बल्कि उनका काम देख रहे व्यक्ति की थी। रामबहादुर राय ने इस दौरान बयान जारी करने वाले की तुलना कैकेयी से की।