विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अपने फैसले में शिंदे की शिवसेना के विधायक भारत गोगवले को विधानसभा में सचेतक के तौर पर मंजूरी दी है। इसलिए अब शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों पर बड़ा संकट मंडराने वाला है। गोगावले की ओर से जारी व्हिप का पालन नहीं करने पर उन विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटकी रहेगी।
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के ऐतिहासिक नतीजे के बाद, जहां मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राहत मिली है, वहीं अब उद्धव ठाकरे और उनके समर्थकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उद्धव ठाकरे ने एक पार्टी और तीर-धनुष के प्रतीक के रूप में शिवसेना को खो दिया है। लेकिन अब उनके सामने भविष्य में भी मुश्किलों के पहाड़ खड़े हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट में राहत की किरण ढूंढनी होगी। अब तो ये भी संकेत मिल रहे हैं कि उद्धव गुट के कुछ विधायक पाला बदलकर शिंदे की असली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
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आदित्य ठाकरे को भी असली शिवसेना का ही व्हिप मानना पड़ेगा
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अपने फैसले में शिंदे की शिवसेना के विधायक भारत गोगवले को विधानसभा में सचेतक के तौर पर मंजूरी दी है। इसलिए अब शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों पर बड़ा संकट मंडराने वाला है। गोगावले की ओर से जारी व्हिप का पालन नहीं करने पर उन विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटकी रहेगी, जो उद्धव ठाकरे के साथ हैं। यही नहीं, उद्धव के पुत्र पूर्व मंत्री विधायक आदित्य ठाकरे को भी असली शिवसेना का ही व्हिप मानना पड़ेगा। अब विधानसभा में ठाकरे गुट की ताकत भी कम हो गई है।
इसलिए विधायकों के मतों से विधान परिषद जाने के इच्छुक उम्मीदवार भी अब उद्धव ठाकरे से ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते। इसके अलावा, चूंकि ठाकरे समूह के विधायक अपात्र नहीं हुए हैं, इसलिए उनमें से कुछ शिंदे गुट की ओर आकर्षित हो सकते हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास अब पार्टी का नाम और तीर-धनुष चिह्न है। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि 1999 के बाद शिवसेना का संशोधित संविधान भी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है।
उद्धव को कई मोर्चों पर लड़नी होगी जंग
उद्धव ठाकरे और उनके सहयोगियों को अब कई मोर्चों पर लड़ाई लड़नी होगी। हालांकि उद्धव ठाकरे विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं, लेकिन नतीजा आने में अभी तीन से दस महीने का समय लग सकता है। तब तक विधानसभा का कार्यकाल भी पूरा हो जाएगा। तकनीकी मुद्दों पर पार्टी को पूरी तरह से खड़ा करना होगा। अब उद्धव ठाकरे ने मशाल का चुनाव चिह्न अपना लिया है। इसी मशाल चुनाव चिह्न पर रितुजा लटके अंधेरी विधानसभा उपचुनाव में चुनी गई हैं। लेकिन यह अस्थायी था क्योंकि समता पार्टी का भी चुनाव चिह्न मशाल है। इसके चलते पार्टी चुनाव चिह्न की समस्या भी उद्धव ठाकरे को सुलझानी होगी।