लोकसभा ने राज्यसभा के पांचों संशोधनों को खारिज करते हुए आधार बिल को पारित कर दिया। अब सरकारी सब्सिडी या सरकारी योजनाओं का लाभ हासिल करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य हो जाएगा।
राज्यसभा ने आधार को अनिवार्य न बनाने समेत पांच संशोधन किए थे। लेकिन लोकसभा ने इनमें से एक को भी नहीं माना। मनी बिल होने की वजह से लोकसभा संशोधनों को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
राज्यसभा में बुधवार को जब इसे पेश किया गया तो कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने संशोधन सुझाए और लोकतांत्रिक अधिकार का हवाला देते हुए सभी में मत विभाजन की मांग की। टीएमसी, बसपा, सपा और बाद में जनता दल(बीजू) के सदन से वॉकआउट करने के बाद भी जयराम रमेश के पांचों संशोधन को सदन की मंजूरी मिल गई । इन संशोधनों को बिल के साथ लोकसभा में भेज दिया गया लेकिन ये सारे संशोधन खारिज हो गए। बिल को लोकसभा में मंजूरी मिल गई।
राज्यसभा में बहस की शुरुआत करते हुए जयराम रमेश आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म करने की कांग्रेस की पुरानी मांग पर अड़े रहे। रमेश के मुताबिक आधार कार्ड की मुख्य उपयोगिता सिर्फ पहचान के लिए होनी चाहिए।
जनता को सब्सिडी देने के लिए आधार कार्ड और यूडीआई नंबर का इस्तेमाल भले जरूरी हो लेकिन इसे अनिवार्य ना कर स्वैच्छिक रखना देश के हित में है। कांग्रेस के साथ सभी विपक्षी दलों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और इसके निजता के अधिकार के हनन के खतरों के प्रति सरकार को आगाह करवाया।
जेडीयू सांसद के सी त्यागी ने आशंका जताई कि इसका इस्तेमाल किसी खास समुदाय के लोगों की पहचान के लिए किया जा सकता है। बहस के जवाब में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि इस बिल में लोगों की निजता के अधिकार का खास खयाल रखा गया है।
जेटली ने यह भी कहा कि यह डर नहीं होना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर किसी की पहचान का गलत इस्तेमाल होगा। जेटली ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष इसके मनी बिल होने से संतुष्ट हैं तथा इसे चुनौती नहीं दी जा सकती।
आधार बिल सिर्फ व्यक्ति की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार इसके आधार पर सब्सिडी के पैसे को सही तरीके से खर्च कर पाएगी। सब्सिडी का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा। हालांकि विपक्ष के नेता उनकी इस दलील से संतुष्ट नहीं थे।
समाजवादी पार्टी सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि इस बिल को जल्दीबाजी में मनी बिल के रुप में पास करने की सरकार के कदम से कई शंकाएं पैदा हो रही है। नरेश अग्रवाल के मुताबिक इसे आम बिल की तरह दोनों सदनों में बहस के साथ पास कराया जाता तो आधार बिल की मर्यादा बनी रहती।
उन्होंने इसे लोकसभा में वापस भेजने के बजाए सेलेक्ट कमेटी में भेजने की पेशकश की। बहुजन समाज पार्टी सांसद सतीश चंद्र मिश्र ने बिल के उस प्रावधान का विरोध किया जिसमें आधार के डाटा का गलत इस्तेमाल करने वाले निजी ठेकेदारों के खिलाफ सिर्फ दस हजार रुपये के जुर्माने की बात कही गई है। हालांकि जेटली ने विपक्ष के सभी आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि इस बिल को जस्टिस शाह कमेटी की रिपोर्ट में सुझाए गए उपायों के आधार पर ही तैयार किया गया है।