एक ताजा अध्ययन से पता चला है कि 'ला नीना' की घटना के चलते 2022-23 के सर्दी के मौसम में बदलाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के दौरान उत्तरी भारत के शहरों में वायु गुणवत्ता के स्तर में सुधार देखा गया। जबकि प्रायद्वीपीय भारत के शहरों में गिरावट दर्ज की गई।
भारत में वायु गुणवत्ता को लेकर लगातार तमाम रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। जलवायु परिवर्तन के चलते 'ला नीना' की घटना ने 2022-23 के सर्दियों के मौसम में एक बदलाव किया है। एक ताजा अध्ययन के मुताबिक, इस घटना के चलते उत्तर भारत के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला। हालांकि प्रायद्वीपीय भारत में प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी देखी गई। गौरतलब है कि 'ला नीना' जैसी घटनाएं समुद्र और जलवायु पर व्यापक असर डालता है।
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उत्तर भारत में सुधरी वायु गुणवत्ता स्तर
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के प्रोफेसर के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने अध्ययन में यह बात कही है। ताजा अध्ययन के मुताबिक, स्थानीय उत्सर्जन और तेजी से बदलती जलवायु वायु गुणवत्ता पर असर डालने वाला कारक है। अध्ययन से पता चलता है कि 2022-23 के सर्दियों के मौसम में प्रायद्वीपीय भारतीय शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब हो गई, लेकिन हाल के दशकों में देखे गए रुझानों के विपरीत, भारत के उत्तरी हिस्से में सुधार हुआ।
गाजियाबाद-नोएडा में वायु गुणवत्ता स्तर में सुधार
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के उत्तर क्षेत्र के कई शहरों में इसका असर देखने को मिला। वायु गुणवत्ता के संबंध में यूपी के गाजियाबाद शहर में इस घटना के बाद 33 प्रतिशत की कमी के साथ सुधार देखा गया। नोएडा में 28 प्रतिशत, रोहतक में 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि दिल्ली में मात्र 10 प्रतिशत का सुधार ही देखने को मिला है, जिसका प्रमुख कारण चारों तरफ से जमीन से घिरा होना बताया गया।
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प्रायद्वीपीय भारत के शहर में बढ़ोतरी
इसके विपरीत, प्रायद्वीपीय भारत के शहरों में वायु गुणवत्ता के स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाली मुंबई भी इसके प्रभाव से छूट नहीं पाया। मुंबई में पीएम2.5 के स्तर में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और बंगलूरू में 20 प्रतिशत, चेन्नई में 12 प्रतिशत, कोयंबटूर में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक के मुताबिक, जलवायु से प्रभावित इस घटना ने बड़े पैमाने पर हवा के पैटर्न को प्रभावित किया। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के जलवायु वैज्ञानिक आर एच कृपलानी ने कहा कि उत्तर भारतीय शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार आया, जबकि इसके विपरीत कई प्रायद्वीपीय भारतीय शहरों में इसमें गिरावट दर्ज की गई।