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शनिवार के बाद कम होता जाएगा मानसून का असर: मौसम विभाग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 26 Sep 2018 10:06 AM IST
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ओडिशा में आए तूफान के बाद से पूरे उत्तर भारत का मौसम बदल गया। इससे कई राज्यों को भारी बारिश का सामना करना पड़ा। वहीं 40 लोगों की मौत की खबर भी सामने आई। बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में 1600 लोग भी फंस गए। रविवार और सोमवार को औसतन 38.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। इन दो दिनों में जुलाई 2015 के बाद से सबसे अधिक बारिश हुई है। वहीं हिमाचल प्रदेश में इस बार सितंबर में बीते 14 सालों में सबसे अधिक बारिश हुई है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक उत्तर भारत में सोमवार को सितंबर के महीने में साल 2014 के बाद से सबसे अधिक बारिश देखने को मिली। आईएमडी के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश का कहना है कि गुजरात में चल रही तेज पश्चिमी हवाएं, ओडिशा में आया चक्रवात, हरियाणा के ऊपर हवा का लो प्रेशर बनना, अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बढ़ना और वेस्टर्न डिस्टरबेंस का सक्रिय होना ही भारी बारिश का कारण है। उन्होंने कहा कि बारिश बुधवार के बाद से कम होने लगेगी।



हिमाचल प्रदेश का हाल इस वक्त सबसे बुरा है। यहां पूरे सितंबर माह में औसतन 125 मिमी बारिश होती है लेकिन बीते चार दिनों में यानि 21-25 सितंबर को 166.7 मिमी बारिश हुई है। अकेले 23 सितंबर को ही 67.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जो कि सामान्य से 15 गुना ज्यादा है। यहां रविवार को ऊना जिले में 96.8 मीमी बारिश हुई जो कि सामान्य से 17 गुना ज्यादा है।

वहीं हमीरपुर में 96.4 मिमी बारिश हुई, जो कि सामन्य से 16 गुना अधिक है। शिमला के मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पूरे सितंबर माह में राज्य में 255 मिमी बारिश हुई। यह राज्य में साल 2004 के बाद से हुई सबसे अधिक बारिश है।

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ओडिशा में आए तूफान के बाद से पूरे उत्तर भारत का मौसम बदल गया। इससे कई राज्यों को भारी बारिश का सामना करना पड़ा। वहीं 40 लोगों की मौत की खबर भी सामने आई। बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में 1600 लोग भी फंस गए। रविवार और सोमवार को औसतन 38.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। इन दो दिनों में जुलाई 2015 के बाद से सबसे अधिक बारिश हुई है। वहीं हिमाचल प्रदेश में इस बार सितंबर में बीते 14 सालों में सबसे अधिक बारिश हुई है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक उत्तर भारत में सोमवार को सितंबर के महीने में साल 2014 के बाद से सबसे अधिक बारिश देखने को मिली। आईएमडी के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश का कहना है कि गुजरात में चल रही तेज पश्चिमी हवाएं, ओडिशा में आया चक्रवात, हरियाणा के ऊपर हवा का लो प्रेशर बनना, अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बढ़ना और वेस्टर्न डिस्टरबेंस का सक्रिय होना ही भारी बारिश का कारण है। उन्होंने कहा कि बारिश बुधवार के बाद से कम होने लगेगी।

हिमाचल प्रदेश का हाल इस वक्त सबसे बुरा है। यहां पूरे सितंबर माह में औसतन 125 मिमी बारिश होती है लेकिन बीते चार दिनों में यानि 21-25 सितंबर को 166.7 मिमी बारिश हुई है। अकेले 23 सितंबर को ही 67.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जो कि सामान्य से 15 गुना ज्यादा है। यहां रविवार को ऊना जिले में 96.8 मीमी बारिश हुई जो कि सामान्य से 17 गुना ज्यादा है।

वहीं हमीरपुर में 96.4 मिमी बारिश हुई, जो कि सामन्य से 16 गुना अधिक है। शिमला के मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पूरे सितंबर माह में राज्य में 255 मिमी बारिश हुई। यह राज्य में साल 2004 के बाद से हुई सबसे अधिक बारिश है।

चार दिनो में बदल गए आंकड़े

भारी बारिश ने महज चार दिनों में हरियाणा समेत अन्य राज्यों के मानसून के आंकड़ों को बदल दिया। हरियाणाा में 21 सितंबर तक कहा जा रहा था कि 22 फीसदी कम बारिश हुई है। लेकिन चार दिनों की बारिश से यह आंकड़ा अब 8 फीसदी पर आ गया है।

अगर पंजाब की बात करें तो 21 सितंबर को कहा जा रहा था कि राज्य में 16 फीसदी कम बारिश हुई है लेकिन इसके बाद हुई बारिश से आंकड़ा बढ़ गया है। अब राज्य में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 10 फीसदी तक अधिक हो गया है। इससे धान और कपास की खेती को भी काफी नुकसान हुआ है।

इन दिनों हुई बारिश ने पहले के आंकड़ों को भी बदल दिया। जहां 21 सितंबर तक कहा जा रहा था कि देश में 10 फीसदी तक कम बारिश हुई है, वहीं अब यह आंकड़ा 8.5 फीसदी पर पहुंच गया है।

अब यह संभावना भी बनी हुई है कि मानसून के खत्म होने तक आंकड़ा सामान्य से नीचे (-4 से -10) तक रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक अनुमान है कि आने वाले दिनों में उत्तर भारत में बारिश का दौर खत्म हो जएगा। वहीं शनिवार से पश्चिमी राजस्थान से मानसून का वापस जाने का क्रम शुरू होगा।
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