पी. विल्सन
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द्रमुक के राज्यसभा सदस्य पी विल्सन ने मंगलवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि या तो मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को समाप्त कर दिया जाए या तमिलनाडु के नीट छूट विधेयक को मंजूरी दी जाए, ताकि राज्य को इस प्रतिस्पर्धी परीक्षा से बाहर रखा जा सके। उन्होंने संसद के उच्च सदन में यह अपील ऐसे वक्त में की है, जब मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद चल रहा है।
'विधानसभा में पारित विधेयक को मंजूरी का इंतजार'
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा ने नीट के बिना मेडिकल पाठ्यक्रम में प्रवेश की अनुमति देने वाले विधेयक को 2021 में पारित किया था और बाद में परीक्षा के खिलाफ और नीट के खतरे को दूर करने के लिए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा कि विधेयक करीब तीन साल से केंद्र की मंजूरी के लिए लंबित है, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता पैदा हो रही है।
'नीट परीक्षा को खत्म करें या राज्य के विधेयक को मंजूरी दें'
विल्सन ने कहा, हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री तत्काल ध्यान दें या वो राज्य सरकार द्वारा पारित विधेयक को मंजूरी दें या नीट और राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणाली को समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम में संशोधन करें। करीब 23.33 लाख छात्रों ने नीट-यूजी 2024 परीक्षा दी थी। सर्वोच्च न्यायालय में प्रश्न पत्र लीक सहित कथित अनियमितताओं को लेकर मामले दर्ज किए गए हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही है।
द्रमुक नेता ने जांच में देरी की आलोचना की
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की अनुशंसा पर पांच मई को आयोजित परीक्षा में कथित अनियममिताओं के संबंध में जांच एजेंसी ने 23 जून को एक प्राथमिकी दर्ज की थी। द्रमुक नेता ने सीबीआई जांच के आदेश में देने में देरी की भी आलोचना की और दावा किया कि इससे धोखेबाजों को दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने और सबूत मिटाने का मौका मिला होगा। विल्सन ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा नीट सहित प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालने को लेकर भी चिंता जताई।