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काबुल पर नजर: अंखुजादा के मार्गदर्शन में बरादर, अब्दुल्ला और करजई तय करेंगे अफगानिस्तान का भविष्य

सार

सूत्र बताते हैं कि अफगानिस्तान में भारत के हितों को साधने की कोशिश तेज हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और अफगानिस्तान के सीईओ अब्दुल्ला अब्दुल्ला वहां के शासन-प्रशासन, शांति के प्रयास, तालिबान के नेताओं से संपर्क में बड़ी भूमिका निभाने में सक्षम हैं...
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तालिबान प्रतिनिधिमंडल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अफगानिस्तान के हालात को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में रक्षा मंत्री, गृहमंत्री, एनएसए सभी मौजूद थे। अफगानिस्तान से लौटे भारत के राजदूत रुदेंद्र टंडन भी बैठक में थे। दिल्ली लौटने के बाद से ही रुदेंद्र टंडन काफी व्यस्त चल रहे हैं। विदेश सेवा के अधिकारी जेपी सिंह की व्यस्तता काफी बढ़ी हुई है। कुल मिलाकर बैठक में भारत ने अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली हैं। उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि पहली प्राथमिकता अफगानिस्तान में भारतीयों की सुरक्षा और उनकी सुरक्षित वापसी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर इसके बाबत लगातार सक्रिय हैं।

अफगानिस्तान में उम्मीद: हामिद करजई, अब्दुल्ला अब्दुल्ला, बरादर

सूत्र बताते हैं कि अफगानिस्तान में भारत के हितों को साधने की कोशिश तेज हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और अफगानिस्तान के सीईओ अब्दुल्ला अब्दुल्ला वहां के शासन-प्रशासन, शांति के प्रयास, तालिबान के नेताओं से संपर्क में बड़ी भूमिका निभाने में सक्षम हैं। दोनों नेता काफी सक्रिय हैं और अफगानिस्तान को किसी भी खून खराबे की स्थिति से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के अफगानिस्तान लौट आने के बाद उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में वहां स्थितियां तेजी से सामान्य होने की तरफ बढ़ेंगी। हामिद करजई के दौर में भी भारत से अफगानिस्तान के रिश्ते बहुत अच्छे थे। वहां के सीईओ अब्दुल्ला अब्दुल्ला भी सकारात्मक सोच के हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि तालिबान के सुप्रीम हिबैतुल्ला अंखुजादा के मार्गदर्शन में चलने वाले नेताओं के साथ भारत को कोई खास परेशानी नहीं होगी।

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भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची कहते हैं कि भारतीय हितों को देखते हुए हम लगातार वहां के हालात पर नजर बनाए हुए हैं। बागची कहते हैं कि भारत अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम है और हम लगातार लोगों के संपर्क में है। भारत द्वारा अफगानिस्तान से अपने राजनयिक समेत अन्य नागरिकों को मंगलवार को दिल्ली लाने में मिली सफलता काफी महत्वपूर्ण है। बताते हैं कि भारत ने इसके लिए समय पर ही वायुसेना के विशेष विमान सी-17 ग्लोबमास्टर को ताजकिस्तान के एयरबेस पर पार्क किया था। इस पूरे प्लान के लिए अमेरिका, ईरान समेत तमाम देशों से संपर्क साधकर राजनयिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने अमेरिकी समकक्ष ब्लिंकन को फोन करके इसे सुनिश्चित कराया।

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तालिबान के पहले की तरह खूंखार होने की संभावना कम

भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को तालिबान के कुछ बदले-बदले से होने की संभावना दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि पिछले 20 साल के दौरान तालिबान के नेताओं ने काफी कुछ सीखा है। उन्हें कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय रिश्ते के महत्व का भी अंदाजा होना चाहिए। इसलिए तालिबान के दूसरे कार्यकाल में उनके बहुत खूंखार होने की संभावना कम है। एक राजनयिक का कहना है कि फिलहाल वह सधा बयान दे रहे हैं। उम्मीद है कि जी-7 की बैठक के बाद काफी कुछ स्थितियां साफ होंगी। सूत्र का कहना है कि तालिबान के नेताओं ने सभी को साथ लेकर चलने, अफगानिस्तान में निर्माण कार्यों को चोट न पहुंचाने और किसी से बदला न लेने के संकेत दिए हैं। तालिबान के नेताओं ने कहा है कि वह इस्लामिक अमीरात के पक्ष में हैं, लेकिन मानवाधिकार का पालन करेंगे। इसलिए बहुत अधिक घबराने की आवश्यकता नहीं है।

वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन का लौटना चिंता की बात है, लेकिन बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। एनबी सिंह कहते हैं कि अमेरिका के वहां से मैदान छोड़कर भाग जाने के बाद निश्चित रूप से तालिबान का हौसला बढ़ा है, लेकिन अफगान नेताओं ने साफ कहा है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करने के पक्ष में हैं। हालांकि एयर वाइस मार्शल का कहना है कि अफगानिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा, लश्कर-ए-जांगवी, जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का नेटवर्क सक्रिय है। बताते हैं कि हक्कानी नेटवर्क के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से करीबी रिश्ते जगजाहिर हैं। इस तरह से पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क के तार तालिबान के नेताओं से जुड़े होने के संकेत हैं। हालांकि विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि अभी इस बारे में कुछ भी कहने से पहले थोड़ा इंतजार करना अच्छा रहेगा।
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