इस भरोसे का परिणाम हुआ कि मेयर के करीबी रवि मोहन तिवारी और एक अन्य करीबी ने आसपास की भूमि अपने नाम पर खरीदकर और बाद में इसे भारी ऊंची कीमतों पर ट्रस्ट को बेच दिया। बताया जाता है कि इस स्तर पर घोटाले की जानकारी ट्रस्ट के ही सदस्यों तक को नहीं थी। अयोध्या मंदिर के पास उपलब्ध सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री किसी भी कार्य के लिए नहीं की जा सकती थी। लेकिन कथित तौर पर मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे ने फर्जी रजिस्ट्री के माध्यम से इस पर अपना कब्जा कर लिया और बाद में इसे ट्रस्ट को दो करोड़ रुपये मे्ं बेच दिया। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के सदस्य क ऋषिकेश उपाध्याय पर भरोसे का परिणाम हुआ कि इस सरकारी भूमि को भी ट्रस्ट के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई और पूरी खरीद-फरोख्त के पहले भूमि की जांच तक नहीं की गई।
यहां खपाया जा रहा था पैसा
आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने शनिवार को आरोप लगाया है कि रविमोहन तिवारी और हरीश पाठक ने सुल्तान अंसारी के साथ मिलकर ट्रस्ट को भूमि बेचकर जो भारी मात्रा में धन अर्जित किया था, वह पैसा उन्होंने बाद में अन्य जगह पर भूमि खरीदने में लगा दिया जिसके दस्तावेज उनके पास हैं। आरोप है कि हरीश पाठक, कुसुम पाठक, रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी ने फर्जी तरीके से दो करोड़ की भूमि ट्रस्ट को 18.50 करोड़ रुपये में 18 मार्च को बेची थी। इससे मिला पैसा उन्होंने अप्रैल महीने में 10 करोड़ रुपये में भूमि खरीद में इस्तेमाल किया। संजय सिंह का आरोप है कि इतना बड़ा भूमि घोटाला केवल स्थानीय लोगों के कारण नहीं हुआ है। इसका पैसा भाजपा के शीर्ष पर बैठे लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस घोटाले की जांच कर उन लोगों के चेहरे हिंदू जनता के सामने लाने चाहिए, जिनके पास तक इस घोटाले का पैसा पहुंच रहा था।