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चिंताजनक: 829 किमी लंबी बिजली की चमक का बना विश्व रिकॉर्ड, 17 मिनट तक दिखाई देती रही; बढ़ रहा खतरा

Sun, 03 Aug 2025 05:21 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

डब्ल्यूएमओ ने पुष्टि की है कि अक्टूबर 2017 में अमेरिका के उत्तरी ग्रेट प्लेन्स क्षेत्र में बिजली की एक अकेली चमक ने 829 किलोमीटर की दूरी तय की। यह दूरी पेरिस से वेनिस के बीच की दूरी के बराबर है। इस बिजली की रेखा को ‘मेगाफ्लैश’ नाम दिया गया है, जो अमेरिका के टेक्सास से लेकर कंसास तक फैली थी।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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आकाश में कौंधती बिजली जहां एक ओर भय और रोमांच का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह विज्ञान के लिए एक चौंकाने वाली चुनौती भी बनी हुई है।

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आसमानी बिजली की एक ऐसी ही अद्भुत घटना ने विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) की रिकॉर्ड बुक में नया अध्याय जोड़ दिया है, जिसने यह दिखाया कि कुदरत की यह शक्ति कितनी विशाल और अप्रत्याशित हो सकती है। डब्ल्यूएमओ ने पुष्टि की है कि अक्टूबर 2017 में अमेरिका के उत्तरी ग्रेट प्लेन्स क्षेत्र में बिजली की एक अकेली चमक ने 829 किलोमीटर की दूरी तय की। यह दूरी पेरिस से वेनिस के बीच की दूरी के बराबर है। इस बिजली की रेखा को ‘मेगाफ्लैश’ नाम दिया गया है, जो अमेरिका के टेक्सास से लेकर कंसास तक फैली थी। यह घटना उस इलाके में दर्ज हुई जिसे विशाल तूफानी बादलों का गढ़ माना जाता है। इस रिकॉर्ड के मुताबिक यह अब तक मापी गई सबसे लंबी बिजली की चमक है, जिसने पूर्व के 768 किलोमीटर के रिकॉर्ड को 61 किमी से पीछे छोड़ दिया। इस घटना की सटीक माप डब्ल्यूएमओ की वेदर एंड क्लाइमेट एक्सट्रीम कमेटी ने उन्नत सैटेलाइट तकनीक के माध्यम से की है, जिसकी पुष्टि अमेरिकन मेट्रोलॉजिकल सोसाइटी के बुलेटिन में भी की गई है।

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मेगाफ्लैश : बिजली की असामान्य रूप से फैली हुई रेखा
‘मेगाफ्लैश’ वह घटना है जब बिजली की चमक सामान्य सीमाओं को पार कर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तक फैलती है। तकनीकी भाषा में इसे ‘हॉरिजॉन्टल मेसोस्केल लाइटनिंग डिस्चार्जेस’ कहा जाता है। यह न केवल विज्ञान के लिए शोध का विषय है बल्कि हवाई यातायात, पर्यावरण और जनजीवन पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो के अनुसार आकाशीय बिजली प्रकृति की एक विस्मयकारी शक्ति है, लेकिन यह हर वर्ष सैकड़ों जिंदगियों को भी लील रही है। यही कारण है कि इसे अंतरराष्ट्रीय ‘अर्ली वार्निंग्स फॉर ऑल’ पहल की प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है।
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हर साल 32 करोड़ पेड़ होते हैं नष्ट
बिजली गिरने की घटनाएं केवल मानव जीवन ही नहीं पर्यावरण पर भी विनाशकारी असर डालती हैं। एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार हर साल करीब 32 करोड़ पेड़ केवल बिजली गिरने से नष्ट हो रहे हैं।

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17 मिनट तक दिखाई देती रही बिजली की चमक

इस रिकॉर्ड के साथ-साथ बिजली से जुड़ी अन्य घटनाएं भी समय-समय पर वैज्ञानिकों को चौंकाती रही हैं। उदाहरण के लिए 18 जून 2020 को उरुग्वे और उत्तरी अर्जेंटीना में बिजली की एक चमक लगातार 17.1 सेकंड तक आकाश में दिखाई दी थी। यह अब तक की सबसे लंबी समयावधि तक दर्ज की गई बिजली की रेखा है। इतिहास में बिजली गिरने से जुड़े घातक हादसे भी दर्ज हैं। 1975 में जिम्बाब्वे में बिजली गिरने से 21 लोग मारे गए थे, जबकि 1994 में मिस्र में बिजली गिरने की वजह से ऑयल टैंक में विस्फोट हुआ और अप्रत्यक्ष रूप से 469 लोग जान गंवा बैठे।

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