केंद्र सरकार के कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय के इस पत्र का बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। सरकार को मालूम था कि कर्मचारी संगठन एरियर की मांग करेंगे। इसके लिए वे विरोध प्रदर्शन भी कर सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने अब ये आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, कर्मियों को 1 जनवरी 2020 को 17 प्रतिशत दर से डीए मिलना था। सरकार ने खुद इसकी घोषणा की थी। बाद में कोरोना के चलते उस फैसले को लागू नहीं किया जा सका। डीए हर छह माह यानी जनवरी और जुलाई में बढ़ता है। कर्मियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अपनी मंशा जता दी है कि वह एरियर नहीं देना चाह रही।
मिश्रा ने अपने पत्र में किया 'अवैध वसूली' का जिक्र ...
शिव गोपाल मिश्रा ने अपने पत्र में कहा है कि जो कर्मचारी एक जनवरी 2020 और 30 जून 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए हैं, उनकी ग्रेच्युटी और दूसरे भुगतानों को लेकर जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा? उन कर्मियों की तो कोई गलती नहीं है, लेकिन वे सभी लाभ से वंचित हो गए हैं। पिछली राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम की बैठक में कर्मचारी पक्ष ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया देय डीए/डीआर की तीन किश्तों का भुगतान एक जनवरी 2020 से करने की मांग की थी।
कर्मचारी पक्ष ने यह भी प्रस्ताव दिया कि एरियर कैसे दिए जाएं, इसके तरीके के बारे में चर्चा करने के लिए वह तैयार है। मिश्रा ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट एक फैसले का हवाला दिया है। उसमें कहा गया है कि आर्थिक संकट के कारण कर्मचारियों के वेतन या पेंशन को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। हालांकि, स्थिति में सुधार होने पर इसे कर्मचारियों को वापस देना होगा।