4G दुनिया में रह रहे हैं हम
2010 के आसपास जब भारत में 3G की शुरुआत हो रही थी उसी दौर में दुनियाभर में 4G तकनीक का प्रवेश हो रहा था। हाई स्पीड, हाई क्वॉलिटी, हाई कैपसिटी वायस और डाटा सर्विस का वादा 4G में किया गया। 3G के मुकाबले इसमें करीब पांच से सात गुना ज्यादा स्पीड मिलती है। इसने हमारे फोन को ही एक हैंड-हेल्ड कम्प्यूटिंग डिवाइस की तरह बना दिया।
भारत की बात करें तो 2012 में एयरटेल ने पहली बार 4G डाटा सर्विस लॉन्च की। दो साल बाद 2014 में एयरटेल ने एपल के साथ मिलकर पहली बार मोबाइल पर 4G सेवा की शुरुआत की। सितंबर 2016 में जियो के लॉन्च के बाद देश में तेजी से 4G का विस्तार हुआ। 2016 के अंत में महज 12 फीसदी डिवाइस 4G थीं। पांच साल बाद 2021 के अंत के ये आंकड़ा 77 फीसदी से भी ज्यादा पहुंच चुका है। मैट्रो सिटी में 2016 में जहां 22 फीसदी 4G फोन थे। जो अब बढ़कर 83 फीसदी हो चुके हैं।
5G से क्या बदलेगा?
4G में डाटा ट्रांसफर में कुछ समय लगता है। 4G में डाटा का ये ट्रांसफर अगर 50 मिलीसेकंड लेता है तो 5G में इसमें महज एक मिलीसेकंड लगेगा। दावा किया जा रहा है कि 5G को कम पावर की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में फोन की बैटरी लाइफ भी कई गुना बढ़ जाएगी। डाउनलोड स्पीड बढ़ने के साथ ही सेलुलर बैंडविड्थ बढ़ेगी, स्पीड में इजाफा होगा और डेटा डिले भी बहुत कम हो जाएगा। सेल्फ-ड्राइविंग कार और रोबोटिक सर्जरी, स्मार्ट सिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी 5G की बड़ी भूमिका होगी।
भारत में कब लॉन्च होगा 5G?
दक्षिण कोरिया, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। भारत में भी इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार इस साल के अंत तक 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी कर सकती है। नीलामी के बाद साल के अंत तक या फिर अगले साल की शुरुआत में देश में 5G सेवाएं शुरू हो सकती हैं।