देश में कोरोना संक्रमण के अलावा गंभीर चिकित्सकीय सेवाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन बेड और वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई थी।
पिछले साल प्रधानमंत्री राहत कोष के जरिए इन वेंटिलेटर का आवंटन भी किया गया। जिसके चलते अब तक 56,000 से ज्यादा वेंटीलेटर आवंटित किए गए हैं, लेकिन इनमें से चालू हालत में अभी केवल 42,000 वेंटिलेटर है।
बाकी अभी सील के पैक अस्पताल में पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं या फिर खरीदी की प्रक्रिया में है। वह लक्ष्य की तुलना में 24 फीसदी 70 फीसदी अभी भी मरीजों को उपलब्ध नहीं हुए हैं। सिर्फ यूपी को 6000 से अधिक आवंटित हुए हैं लेकिन इनमें से 4258 ही मरीजों को उपलब्ध हैं।
दरअसल दूसरी लहर में ऑक्सीजन बेड के अलावा आईसीयू, वेंटीलेटर की भारी कमी देखने को मिली थी। पहली बार लहर के दौरान जब मामले सामने आए थे। तब सरकार ने अनुमान लगाया था कि शायद अधिक जरूरत न पड़े, लेकिन अलग-अलग म्यूटेशन होने के बाद स्थिति भयावह हुई। अगर पर्याप्त इंतजाम नहीं हुए तो तीसरी लहर में दिक्कत आएगी।
50 हजार पीएम राहत कोष से खरीदें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में जानकारी दी है कि आठ अलग-अलग कंपनियों के जरिए 59873 वेंटिलेटर की खरीदी हुई है। जिनमें से 56,043 वेंटिलेटर आवंटन की प्रक्रिया में हैं। इन 56,043 में से 47,130 वेंटिलेटर ही अब तक आवंटित हुए हैं जिनमें 42,419 अभी चालू स्थिति में है। 59,873 में से 50,000 लीटर सरकार ने प्रधानमंत्री राहत कोष के जरिए खरीदे हैं।
1.23 करोड़ रेमडेसेविर इंजेक्शन राज्यों को दिए गए
आरटीआई कार्यकर्ता चंडीगढ़ निवासी राम कुमार गर्ग को मंत्रालय ने बताया कि अब तक केंद्र की ओर से 422.79 लाख मास्क आवंटित किए गए हैं। जबकि 176.91 लाख पीपीई किट और 1.23 करोड़ रेमडेसेविर राज्यों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। अस्पतालों के स्तर पर वेंटीलेटर के चालू होने या वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है। राज्यों को वेंटिलेटर आवंटित किए जाते हैं जहां से अस्पतालों को दिए जा रहे हैं।