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Study: वैश्विक स्तर पर जल संकट से जूझ रहे देशों में सिंचाई का 52 फीसदी विस्तार, 36 फीसदी भारत की हिस्सेदारी

Sat, 16 Mar 2024 07:17 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मौजूदा समय में इंसानों के इस्तेमाल के योग्य 90 फीसदी से अधिक जल का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है। कृषि भूमि के करीब 24 फीसदी हिस्से पर सिंचाई की व्यवस्था है, जो दुनिया का करीब 40 फीसदी खाद्य उत्पादित कर रहा है।
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वैश्विक स्तर पर साल 2000 से पूर्व ही जल संकट की समस्या से जूझ रहे देशों में सिंचाई का 52 फीसदी विस्तार हुआ है। इसमें 36 फीसदी हिस्सेदारी भारत की रही है। अमेरिका, जर्मनी, फिनलैंड और चीन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों, राष्ट्रीय कृषि जनगणना और सरकारी रिपोर्टों की मदद ली है। इनकी मदद से उन्होंने 243 देशों के सिंचाई संबंधी ताजा आंकड़ों का उपयोग किया है।

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मौजूदा समय में इंसानों के इस्तेमाल के योग्य 90 फीसदी से अधिक जल का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है। कृषि भूमि के करीब 24 फीसदी हिस्से पर सिंचाई की व्यवस्था है, जो दुनिया का करीब 40 फीसदी खाद्य उत्पादित कर रहा है। ‘जर्नल नेचर वाटर’ में प्रकाशित अध्ययन में यह भी सामने आया कि साल 2000 से 2015 के बीच वैश्विक स्तर पर सिंचाई की व्यवस्था वाले क्षेत्र में 11 फीसदी (3.3 करोड़ हेक्टेयर) की वृद्धि हुई है। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने इस बात की जांच की कि 21वीं सदी की शुरूआत से सिंचाई की व्यवस्था वाली कृषि भूमि में किस प्रकार से बदलाव आया है।

सिंचित कृषि क्षेत्र में 2.8 करोड़ हेक्टेयर का इजाफा
इनमें एक तरफ जहां उत्तर-पश्चिम भारत और उत्तर-पूर्व चीन जैसे क्षेत्र शामिल हैं जहां सिंचित क्षेत्र में पर्याप्त विस्तार हुआ है, वहीं रूस जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं जहां इसमें गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार जहां एशिया के सिंचित कृषि क्षेत्र में इस दौरान 2.8 करोड़ हेक्टेयर का इजाफा हुआ है। वहीं, दक्षिण अमेरिका में भी इसमें 56 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है।
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चीन और भारत में सबसे अधिक सिंचाई विस्तार
जिन देशों में सिंचाई का विस्तार सबसे अधिक हुआ, वे चीन (12.8 एमएचए) और भारत (8.5 एमएचए) थे और इसके पीछे एक प्रमुख कारण खाद्य आत्मनिर्भरता बनाए रखने के लिए सिंचाई परियोजनाओं में बढ़ता निवेश था।

भारत में कुल 86 फीसदी विस्तार
2015 से जुड़े आंकड़ों के अनुसार भारत और पाकिस्तान में सिंचाई का सबसे अधिक अस्थिर विस्तार देखा गया है। भारत में जहां सिंचाई का कुल 86 फीसदी (1.21 करोड़ हेक्टेयर) विस्तार उन क्षेत्रों में हुआ है, जो पहले ही भूजल और सतह पर मौजूद पानी की कमी से त्रस्त हैं। इसी तरह पाकिस्तान में यह आंकड़ा 87 फीसदी (करीब 15.3 लाख हेक्टेयर) दर्ज किया गया है।

विदेशों में यह है स्थिति
ब्राजील में सिंचाई में 34 लाख हेक्टेयर (96 फीसदी) इंडोनेशिया में नौ लाख हेक्टेयर (76 फीसदी) पेरू में आठ लाख हेक्टेयर (94 फीसदी), इटली में तीन लाख हेक्टेयर (85 फीसदी) और फ्रांस में 88 फीसदी यानी दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था में हुआ विस्तार जल संसाधनों के लिहाज से अनुकूल था।

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