श्रम और रोजगार मंत्रालय को मिली बड़ी सफलता
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श्रम और रोजगार मंत्रालय ने पिछले वित्तीय वर्ष में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, दरअसल मंत्रालय ने अपने सुलह प्रयासों की मदद से देश में 50 बड़ी हड़तालों को टाला है, जो मंत्रालय की तरफ से हड़तालों को टालने में 100 प्रतिशत सफलता दर को दर्शाती है। सूत्रों के अनुसार, यह सफलता देश में त्रिपक्षीय तंत्र की ताकत को भी दर्शाती है। त्रिपक्षीय तंत्र में मुख्य श्रम आयुक्त, यूनियनों और उस संगठन के अधिकारी शामिल होते हैं, जिसके खिलाफ हड़ताल का आह्वान किया जाता है।
इतने हजार से अधिक कर्मचारियों को हुआ लाभ
भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत मुख्य श्रम आयुक्त (सी) के कार्यालय की तरफ से की गई इन सुलह प्रक्रियाओं से 55 हजार से अधिक कर्मचारियों को लाभ हुआ है। वहीं त्रिपक्षीय समझौता प्रक्रिया के माध्यम से 1370 करोड़ रुपये की राहत पर सहमति बनी, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और सरकारी संगठनों के कर्मचारियों को लाभ हुआ। एक प्रमुख मामले में सीमेंट निर्माता संघ और कई ट्रेड यूनियनों की तरफ से प्रतिनिधित्व किए गए सीमेंट कामगारों के साथ समझौता शामिल था, जिसके परिणामस्वरूप कई सीमेंट निर्माण इकाइयों में 18 हजार से अधिक कर्मचारियों के लिए 700 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन समझौता हुआ।
कई अहम समझौते में मिली सफलता
वहीं इस साल की शुरुआत में एक अन्य अहम समझौते में 298.3 करोड़ रुपये का राहत दिया गया, जिससे देश भर के कई ग्रामीण बैंकों में 30 हजार से अधिक श्रमिकों को लाभ हुआ। श्रम और रोजगार मंत्रालय के मुताबिक जनवरी 2024 से 21 जून, 2024 तक, त्रिपक्षीय समझौता प्रक्रिया के माध्यम से कुल आठ बड़ी हड़तालें टाली गईं हैं। इनमें आईबीए बनाम अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) और अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (एआईबीओए) के प्रबंधन की तरफ से हड़तालें वापस बुलाई गई, वहीं सेल बनाम उसके यूनियनों के प्रबंधन, एयर इंडिया एक्सप्रेस बनाम उनके कर्मचारी यूनियनों और अन्य शामिल हैं।
हड़तालों में बढ़ोत्तरी को रोकना था पहला उद्देश्य
एक सूत्र ने बताया कि इन सुलह प्रयासों का पहला उद्देश्य विवादों और शिकायतों को पारस्परिक रूप और लाभकारी तरीके से हल करना था। इसमे खुले संवाद और बातचीत ने गलतफहमियों और संघर्षों को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने में मदद की, जिससे हड़तालों में बढ़ोत्तरी को रोका जा सका है। इन हड़तालों की सफल रोकथाम ने बड़ी संख्या में कार्य-दिवसों को बचाने, उत्पादकता के स्तर को बनाए रखने और आर्थिक नुकसान को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, सुलह प्रक्रियाओं ने एक सामंजस्यपूर्ण कार्य वातावरण को बढ़ावा दिया और श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच संबंधों को मजबूत किया, जिससे लंबे समय तक औद्योगिक शांति और स्थिरता के लिए आधार तैयार हुआ।