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बंगाल में 45 दिन का वादा बना मुद्दा: सातवां वेतन आयोग लागू करने की घोषणा पर घमासान, जानें अमित शाह ने क्या कहा

Thu, 05 Mar 2026 12:35 AM IST
एन अर्जुन डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलकाता।

सार

पश्चिम बंगाल में सातवां वेतन आयोग 45 दिनों में लागू करने के वादे को लेकर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा सरकार बनने पर यह घोषणा की है। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। कर्मचारी संगठनों और युवाओं के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। 
 
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अमित शाह - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों 45 दिन की समयसीमा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राज्य दौरे के दौरान कहा कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है तो 45 दिनों के भीतर सातवां वेतन आयोग लागू कर दिया जाएगा। इस बयान के बाद राज्य में सियासी बहस तेज हो गई है। सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा इस घोषणा को लेकर चर्चा कर रहे हैं। वहीं सत्तारूढ़ दल और वामपंथी दलों ने इस वादे को चुनावी रणनीति बताया है।
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इस मुद्दे ने इसलिए भी राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है क्योंकि राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारी लंबे समय से महंगाई भत्ता यानी डीए को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सातवां वेतन आयोग लागू करने का वादा सीधे कर्मचारियों से जुड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा का कहना है कि सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर आयोग लागू कर दिया जाएगा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाएगी। वहीं विपक्ष का आरोप है कि यह केवल चुनाव से पहले दिया गया आकर्षक वादा है।

क्या कहा था अमित शाह ने?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में कहा था कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है तो 45 दिनों के भीतर सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में खाली पड़े सरकारी पदों को भरने की प्रक्रिया 26 दिसंबर से शुरू की जाएगी। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को राहत देने के लिए अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की विशेष छूट देने का भी संकेत दिया गया। शाह ने दावा किया कि नई भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित होगी ताकि युवाओं का भरोसा वापस लौट सके।
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कर्मचारी संगठनों और विपक्ष की प्रतिक्रिया
भाजपा समर्थित कर्मचारी संगठनों ने इस घोषणा को साहसिक और समयबद्ध फैसला बताया है। उनका कहना है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो 45 दिनों में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। लेकिन वामपंथी और तृणमूल समर्थित कर्मचारी संगठनों ने इसे भ्रामक करार दिया है। उनका सवाल है कि जब राज्य पहले से ही डीए बकाया और वित्तीय दबाव जैसी समस्याओं से जूझ रहा है तो इतनी जल्दी सातवां वेतन आयोग लागू करना कैसे संभव होगा।

ममता बनर्जी ने बताया भ्रामक दावा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घोषणा को पूरी तरह भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार पहले ही वेतन आयोग से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना और पारंपरिक पेंशन व्यवस्था जारी है। ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा शासित कई राज्यों में पुरानी पेंशन व्यवस्था खत्म कर दी गई है, जबकि बंगाल में इसे जारी रखा गया है।
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कर्मचारियों और युवाओं के बीच चर्चा
राज्य में इस मुद्दे को लेकर कर्मचारियों और युवाओं के बीच भी चर्चा तेज है। पश्चिम मेदिनीपुर के एक शिक्षक अनंत कुमार कहते हैं कि अगर 45 दिनों में सातवां वेतन आयोग लागू हो जाता है तो यह बड़ा फैसला होगा, लेकिन असली सवाल इसके अमल का है। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही अंजलि का कहना है कि अगर आयु सीमा में पांच साल की छूट मिलती है तो हजारों युवाओं को राहत मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में लाखों सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार बड़ा मतदाता वर्ग हैं, इसलिए यह मुद्दा चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

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