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पिछले चुनावों में 3410 उम्मीदवारों ने नहीं भरा था आयकर

Wed, 11 Jan 2017 12:59 PM IST
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग इस बार उम्मीदवारों को आय का स्रोत बताने पर ज्यादा जोर नहीं दे रही है। दरअसल 2012 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा के विधानसभा चुनावों में 38 फीसदी (3410) उम्मीदवारों ने अपने हलफनामों में घोषित किया कि उन्होंने कभी भी आयकर रिटर्न (आईटीआर) नहीं भरा। इन राज्यों के चुनावों में 8978 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था।
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गैर सरकारी संस्था असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने 2012 में इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर  एक रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश के 34 फीसदी (2259), उत्तराखंड के 45 फीसदी (352), पंजाब के 52 फीसदी (551), मणिपुर के 32 फीसदी (86) और गोवा के 76 फीसदी (162) उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग को दाखिल किए गए शपथ पत्र में घोषणा की थी कि उन्होंने कभी भी आयकर रिटर्न नहीं भरा है।

एडीआर की रिपोर्ट से पिछले चुनाव में एक और खुलासा हुआ है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में शपथ पत्र में पैन कार्ड की जानकारी न देने वाले उम्मीदवारों की संख्या 41 फीसदी (3650) थी। इन्हीं पांच राज्यों के वर्ष 2007 के विधानसभा चुनावों में 61 प्रतिशत उम्मीदवारों ने पैन कार्ड की जानकारी शपथ पत्र में दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में 44 फीसदी (2923), उत्तराखंड में 30 फीसदी (232), पंजाब में 35 फीसदी (373), मणिपुर में 37 फीसदी (101) और गोवा में 10 फीसदी (21) उम्मीदवारों ने पैन कार्ड की जानकारी नहीं दी।
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आयकर विभाग की एक जानकारी हैरत में डालने वाली

इस रिपोर्ट से इतर आयकर विभाग की एक जानकारी हैरत में डालने वाली है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद एडीआर ने उन 20 सांसदों की आय की पूरी जानकारी विभाग से मांगी थी जिनकी संपत्ति कई गुना बढ़ गई थी। लेकिन आयकर विभाग ने जानकारी देने से मना कर दिया। फिर केंद्रीय सूचना आयोग ने हाल ही में पूछा कि आयकर विभाग को क्यों लगता है कि यह जानकारी जनहित में नहीं है। नवंबर 2016 में मियाद खत्म होने के बाद विभाग ने केंद्रीय सूचना आयोग को भी इसकी जानकारी नहीं दी।

एडीआर फाउंडर ट्रस्टी जगदीप छोकर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में लोक प्रहरी ने एक याचिका दायर की थी। इस केस में एडीआर भी सह-याचिकाकर्ता है। इसी मामले के संदर्भ को ध्यान में रखकर ही चुनाव आयोग ने ऐसा बयान दिया है। इस मामले में मांग की गई है कि यह तय हो कि चुनाव लड़ने वाला हर उम्मीदवार आयकर रिटर्न भरे। अगर उम्मीदवार आयकर रिटर्न नहीं भरता है तो उस उम्मीदवार की नामांकन खारिज कर देना चाहिए।
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