CRPF Inducts Women Commandos Into Elite Anti-Naxal CoBRA Unit
- फोटो : Amar Ujala
कोबरा कमांडो के बारे में कहा जाता है कि ये कुछ बातों में अमेरिकन मरीन कमांडो से आगे हैं। पांच साल पहले गणतंत्र दिवस की परेड में ये कमांडो पहली बार नजर आए थे। इस खास इकाई का गठन बिल्कुल वैसे ही किया गया है, जिस आधार पर अमेरिकी कमांडो तैयार किए जाते हैं। कोबरा की ट्रेनिंग से लेकर उनके ऑपरेशन को अंजाम देने के तरीकों तक, बहुत कुछ यूएस मरीन कमांडो से मिलता है। खासतौर पर घने जंगलों में नक्सली और आतंकियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए इस विशिष्ट फोर्स को खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है।
बात हथियारों की हो या अन्य दूसरे तकनीकी उपकरणों की, वे दूसरे बलों से अलग हैं। बिना किसी मदद के लगातार डेढ़ सप्ताह तक जंगलों में लड़ते रहना इस फोर्स की खासियत है। आतंकी संगठन अलकायदा के सरगना लादेन को जिन अमेरीकन मरीन कमांडो ने मारा था, वे बिना किसी मदद के जंगल में लगातार तीन रातों तक लड़ सकते हैं। सीआरपीएफ के प्रत्येक कोबरा कमांडो के लिए ट्रेनिंग के दौरान सात दिन तक जंगल में लड़ने की परीक्षा पास करना अनिवार्य है।
अगर यहां पर वजन लेकर जंगल में नियमित रूप से लड़ते रहने का रिकॉर्ड देखें, तो वह ब्रिटेन के विशिष्ट कमांडो दस्ते एसएएस के नाम पर दर्ज है। इस दस्ते के जवान 30 किलो वजन उठाकर दस रातें जंगल में गुजार सकते हैं। कोबरा दस्ते की खास बात ये है कि इसके कमांडो 23 किलो वजन के साथ 11 रातों तक गहन जंगल से गुजरने में समर्थ हैं।
जवानों को पर्सनल आर्मर सिस्टम, ग्राउंड ट्रूप्स हेलमेट, यूएस के एम 1 हेलमेट और जर्मन आर्मी के स्टेहेलम हेलमेट मुहैया कराए जाते हैं। ये कमांडो इस्राइल निर्मित एमटीएआर व एक्स 95 राइफल जैसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते हैं। कमांडो के पास जीपीएस के अलावा रात को देखने के लिए चश्मा होता है। कोबरा कमांडो जैमर और बुलेट प्रूफ तकनीक से लैस रहते हैं। महिला कमांडो को ट्रेनिंग के दौरान विशेष हथियार चलाना, सामरिक योजना बनाना, फील्ड क्रॉफ्टस, विस्फोटकों की पहचान और जंगल में जीवित रहने की कला सिखाई जाएगी।