भारत ने 26/11 हमलों की 13वीं बरसी पर शुक्रवार को पाकिस्तान हाई कमीशन के एक वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया और इस घटना की गहराई से जांच कराने की मांग उठाई। भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जो नोट दिया गया, उसमें पाकिस्तान को भारत के खिलाफ अपनी जमीन से संचालित होने वाली आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भी कहा गया है।
विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर एक बयान भी जारी किया। इसमें कहा गया कि भारत ने मुंबई में 13 साल पहले हुए आतंकी हमलों को लेकर पाकिस्तान से गहन जांच की मांग की है। साथ ही पाकिस्तान को अपने उस वादे की भी याद दिलाई गई, जिसके तहत उसे भारत के खिलाफ अपनी नियंत्रण वाली जमीन से फैलाए जा रहे आतंकवाद को भी रोकना है।
बयान में आगे कहा गया, "यह गहरे दुख का विषय है कि एक जघन्य आतंकी हमले के 13 साल बाद भी 15 देशों के 166 पीड़ितों के परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है और वे मामले के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने में पाकिस्तान की तरफ से भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई।"
विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि इस आतंकी हमले की योजना पाकिस्तान में बनी थी और वहीं से इसे कार्यान्वित किया गया था। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि हम एक बार फिर पाकिस्तान से दोहरा मापदंड छोड़ने और इस जघन्य हमले के षड्यंत्रकारियों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग करते हैं। यह केवल निर्दोष पीड़ितों के परिवारों के प्रति पाकिस्तान की जवाबदेही का ही विषय नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी का भी विषय है।
भारत ने कहा कि भारत 26/11 के मुंबई हमले में जान गंवाने वालों और शहीदों के परिवारों को न्याय दिलाने की कोशिशें जारी रखेगा। इसमें कहा गया है कि 26/11 मुम्बई आतंकी हमले की 13वीं बरसी पर सरकार और भारत के लोग इस हमले के पीड़ितों और लोगों की सुरक्षा करते हुए जान गंवाने वाले वीर सुरक्षाकर्मियों का स्मरण करते हैं ।
26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी समुद्री मार्ग से मुंबई पहुंचे थे। उन्होंने ताज होटल, ओबेरॉय होटल समेत कई जगहों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें 18 सुरक्षाकर्मियों समेत 166 लोगों की मौत हो गई थी।