संसद के उच्च सदन में कुल 25 सरकारी विधेयक लंबित हैं। इनमें से एक विधेयक 1992 का है, जो पंचायत चुनावों के लिए दो बच्चों के मानदंड को अपनाने से जुड़ा है। राज्यसभा के बुलेटिन के मुताबिक, लंबित विधेयकों में दिल्ली किराया (संशोधन) विधेयक, 1997 भी है। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में किराए के नियमन, किराए वाले परिसरों की मरम्मत और किरायेदारों को बेदखल करने के प्रावधान हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) कानून में संशोधन के प्रावधान वाला एक विधेयक भी लंबित विधेयकों में शामिल है।
आम तौर पर लोकसभा में पेश होने वाले विधेयक की अवधि सदन का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही खत्म हो जाती है, लेकिन राज्यसभा एक स्थायी सदन है। इसका कभी विघटन नहीं होता। इस सदन में पेश और लंबित विधेयक तब तक सूची में बने रहते हैं, जब तक कि सरकार उन्हें वापस नहीं ले लेती।
ये विधेयक लंबित
- नगरपालिका (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) विधेयक, 2001
- बीज विधेयक, 2004
- भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी फार्मेसी विधेयक, 2005
- भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2008
- खान (संशोधन) विधेयक, 2011
- अंतर-राज्य प्रवासी कामगार (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) संशोधन विधेयक, 2011
- भवन और अन्य निर्माण श्रमिक संबंधित कानून (संशोधन) विधेयक, 2013
- रोजगार कार्यालय (रिक्तियों की अनिवार्य अधिसूचना) संशोधन विधेयक, 2013
- राजस्थान विधान परिषद विधेयक, 2013
- पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2013
- दिल्ली किराया (निरसन) विधेयक, 2013
- अनिवासी भारतीय विवाह पंजीकरण विधेयक, 2019
- अंतर-राज्य नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक, 2019
- कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020
मानसून सत्र में पेश विधेयक
- निरसन और संशोधन विधेयक, 2023
- डाकघर विधेयक, 2023
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक, 2023