अमेरिकन तकनीक से लैस पाक सैनिकों पर प्रहार
पंजाब सेक्टर में भी बीएसएफ ने शौर्य की गाथा लिखी। सामने मॉडर्न पाकिस्तान आर्मी थी। खास बात ये रही कि उनके पास अमेरिकन तकनीक थी। पाकिस्तान ने पूरे संसाधनों के साथ भारतीय पोस्ट पर हमला किया, लेकिन बीएसएफ ने पोस्ट नहीं छोड़ी। एसके सूद ने लिखा है कि उस समय पाकिस्तान, ओवरऑल बेहतर स्थिति में था। बीएसएफ के सहायक कमांडेंट आरके वाधवा ने 31 वीं बटालियन को साथ लेकर 'राजा मोहतम' पर हमला कर दिया। केवल दो प्लाटून उनके साथ थी। उन्होंने एक खास रणनीति के तहत पीछे से दुश्मन पर हमला किया। सात दिसंबर को पाकिस्तान के हाथ से छीनकर वहां कब्जा कर लिया। उस लड़ाई में वाधवा शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत, महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। जलालाबाद, फाजिल्का सेक्टर, गुरदासपुर, डेरा बाबा नानक सेक्टर जैसे इलाकों में दुश्मन कदम नहीं रख सका। वहां की 17 बीओपी पर पाक ने कब्जे का प्रयास किया, लेकिन बीएसएफ ने उसके मंसूबे पूरे नहीं होने दिए।
आर्मी की सप्लाई लेन क्लीयर कराई
बीएसएफ की 86वीं बटालियन को दवाकी सिलहट, जो आर्मी सप्लाई का एक कोण था, उस रूट को क्लीयर कराने की जिम्मेदारी मिली। एक कंपनी ने ही यह टॉस्क पूरा कर दिया। कमला बगान पर 3 दिसंबर 1971 को कब्जा कर लिया गया। सहायक कमांडेंट शिवाजी सिंह ने ओपी हिल का इलाका भी सुरक्षित बनाए रखा। 86, 87 व 84 बटालियन ने कच्छार में दुश्मन को मात दी। 23 बटालियन ने अजनाला सेक्टर में तो वहीं 57 बटालियन ने मोइल बीओपी खाली कराई। इस दौरान 5 सिख बटालियन भी बीएसएफ के साथ थी। भारतीय सुरक्षा बलों ने सलीम पोस्ट से पाकिस्तान को भगा दिया।
शहादत के अलावा गुम भी हुए थे बीएसएफ जवान…