मुंबई के लखी समूह के सीईओ दिलीप कुमार लखी की आस्था भगवान में इतनी अधिक है कि उन्होंने तीन सालों में दो मंदिरों को करीब 150 किलो सोना दान में दे दिया है।
इसमें से 100 किलो सोना गुजरात के सोमनाथ मंदिर को दिया गया है। सोमनाथ मंदिर प्रशासन ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में इस बात की पुष्टि भी की है। वहीं दूसरी ओर कंपनी की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार समूह ने करीब 51 किलो सोना उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर को भी दिया है।
हीरे का कारोबार करने वाले दिलीप कुमार ने इसी साल सोमनाथ मंदिर को 40 किलो सोना दान में दिया है, जबकि इससे पहले के सालों में 60 किलो सोना दान दिया था।
कितना भव्य है ये मंदिर?
मंदिर की भव्यता का पता इसी बात से चलता है कि मंदिर का गेट भी सोने का बना हुआ है। मंदिर में गर्भगृह, नाग, दीवारें, झंडे का डंडा, डमरू, त्रिशूल, शिखर और शिवमुकुट सोने का बना हुआ है। साथ ही सोने के आभूषणों से भी इसे सजाया गया है।
माना जाता है कि सदियों पहले सोमनाथ महादेव मंदिर पूरा सोने से बना था, लेकिन इसे कई बार लुटेरों के द्वारा लूटा गया और बाद में यह मंदिर मात्र पत्थर का रह गया। सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था और 1995 में उस समय के राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा ने इसे देश को दे दिया।
क्या है लखी समूह का इतिहास?
लखी समूह करीब 60 सालों से हीरे का कारोबार कर रहा है। इसकी शुरुआत 1944 में दिलीप कुमार लखी के पिता श्री विसनदास होलाराम लखी ने जयपुर से की थी।
तब से लेकर अब तक इस समूह ने पूरे देश में अपनी शाखाएं खोल ली हैं और मुंबई में इसकी मुख्य शाखा है। आज के समय में लखी समूह देश में हीरे का काम करने वाले सबसे बड़े समूहों में से एक है।