भारत चीन के बीच दोकलम के मुद्दे को सुलझाने के लिए 13 राउंड की बैठकें हुई थी। यह बात विदेश मामलों की संसदीय कमेटी की रिपोर्ट में सामने आई है। पिछले साल भारत और चीन की सेना दोकलम के मुद्दे पर आमने-सामने थी जिसकी वजह से सीमावर्ती इलाकों में तनाव की स्थिति बन गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन के द्वारा अतिक्रमण का यह बड़ा मगर असफल प्रयास था। इससे भारत, भूटान और चीन के ट्राई जंक्शन के इलाके में बड़ा परिवर्तन होता और भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि चीन ने भूटान के साथ 24 राउंड में हुई बैठकों में दोकलम के बदले किसी और इलाकें को बदलने की पेशकश की थी। कमेटी ने ट्राई जंक्शन के करीब चीन के निर्माण को लेकर भी चिंता जाहिर की जिसे अबतक तोड़ा नहीं गया है।
इस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर की मानें तो दोकलम कभी भारत की संप्रभुता का सवाल नहीं रहा मगर फिर भी यह मुद्दा भारत सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की शुरुआत पिछले साल 7 जुलाई को हैमबर्ग में जी-20 बैठक से इतर प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत से हुई थी।
भारत के तत्कालीन विदेश सचिव के मुताबिक बातचीत में भारत ने दोकलम पर चीन के संप्रभुता के दावे को खारिज किया और मौजूदा स्थिति में उसके कदम से बदलाव होने की बात कही। भारत ने सुरक्षा के मुद्दे को भी गंभीरता से उठाया। दोकलम को मुद्दे को सरकार ने जिस तरीके से संभाला उसको लेकर कमेटी ने भारत सरकार की तारीफ की है।