देश के कुल 107 सांसदों और विधायकों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण देने के आरोप में मामले दर्ज हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के 22 सांसदों पर नफरती भाषण के खिलाफ मामले दर्ज हैं। वहीं, कांग्रेस के दो और आम आदमी पार्टी (आप) सहित एआईएमआईएम, एआईयूडीएफ, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, पीएमके, शिवसेना (यूबी) और वीसीके के एक-एक सांसद के खिलाफ केस दर्ज हैं, जबकि एक निर्दलीय सांसद हैं।
‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) के विश्लेषण के मुताबिक, 33 सांसदों ने अपने खिलाफ नफरती भाषण से संबंधित मामलों की घोषणा की है, जिनमें से सात उत्तर प्रदेश से, चार तमिलनाडु, तीन-तीन बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना, जबकि दो-दो असम, गुजरात, महाराष्ट्र और बंगाल से तथा एक-एक झारखंड, मध्य प्रदेश, केरल, ओडिशा और पंजाब से हैं। पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों का सामना कर रहे 480 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा है। यह विश्लेषण सांसदों और विधायकों की ओर से पिछला चुनाव लड़ने से पहले दिए गए हलफनामों पर आधारित है।
74 विधायकों में से भाजपा के 20 और कांग्रेस के 13
एडीआर के मुतबिक, 74 विधायकों ने अपने खिलाफ नफरती भाषण से जुड़े मामलों की घोषणा की है। सबसे अधिक भाजपा के 20 विधायकों के खिलाफ केस दर्ज हैं। वहीं, कांग्रेस के 13, आप के छह, सपा और वाईएसआरसीपी के पांच-पांच, द्रमुक और राजद से चार-चार, एआईटीसी और एसएचएस के तीन विधायकों के खिलाफ केस दर्ज हैं। एआईयूडीएफ से दो और एआईएआईएम, सीपीआई(एम), एनसीपी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, टीडीपी, तिपारा मोथा पार्टी और टीआरएस के एक-एक विधायकों के खिलाफ नफरती भाषण मामले में केस दर्ज हैं। इसके साथ ही दो निर्दलीय विधायकों ने भी अपने खिलाफ दर्ज मामलों का खुलासा किया है।