शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है, लेकिन इसकी कमी से होने वाले विकार से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है। विश्वस्तर पर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) बढ़ रहा है। भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग इसके शिकार हैं। इनमें से 4.7 करोड़ गंभीर स्तर से पीड़ित हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग से जुड़े डॉक्टरों के अध्ययन में यह सामने आया है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पिछले दो दशकों में इस पर किए गए सात अन्य अध्ययनों का विश्लेषण किया है। यह शोध 11,009 लोगों पर किए अध्ययन पर आधारित है, जिनकी औसत आयु 35.5 से 47.8 वर्ष के बीच थी। अध्ययन में पांच से 10 वर्ष की आयु के बच्चों में इसकी व्यापकता और जोखिम कारकों का अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि ओएसए भारतीय बच्चों को तेजी से प्रभावित कर रहा है।
पांच फीसदी में गंभीर स्थिति
अध्ययन के मुताबिक, देश में करीब 11 फीसदी वयस्क इससे पीड़ित हैं। अनुमान है कि जहां 13 फीसदी भारतीय पुरुष इससे पीड़ित हैं, वहीं केवल पांच फीसदी महिलाएं इसकी शिकार हैं। पांच फीसदी भारतीय मध्यम से गंभीर ओएसए के शिकार हैं। अनुमान के मुताबिक महिलाओं में ओएसए की संभावना 30 साल की उम्र में दो फीसदी से बढ़कर 60 साल की उम्र में 28 फीसदी हो जाती है। पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 30 वर्ष की आयु में चार फीसदी से बढ़कर 60 वर्ष की आयु में 67 फीसदी हो जाता है।
कारण : खराब जीवनशैली
यह विकार खराब जीवनशैली और खानपान में लापरवाही की वजह से देखने को मिलता है। इसमें सुधार और नियमित व्यायाम फायदेमंद है। इससे पीड़ित व्यक्ति को पीठ के बल सोने से बचना चाहिए, बल्कि पेट के बल सोना फायदेमंद है।
मृत्यु का भी खतरा
ओएसए में व्यक्ति की श्वास नली के ऊपरी मार्ग में रुकावट होने लगती है, जिसके कारण जब वह सोता है तो उसकी सांस बार-बार रुकती और चलती है। इसकी वजह से सोते समय भी सांस रुक सकती है, जो मृत्यु का कारण तक बन सकती है।