भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के परवाणू शाखा कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय शिमला में पुलिस अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम करवाया। इसमें नकली और घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों की पहचान, अनिवार्य गुणवत्ता मानकों के पालन और भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
विश्व मानक दिवस-2026 के अवसर पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के परवाणू शाखा कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय शिमला में पुलिस अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम करवाया। इसमें नकली और घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों की पहचान, अनिवार्य गुणवत्ता मानकों के पालन और भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में 51 वरिष्ठ पुलिस, सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक अधिकारियों ने भाग लिया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने की। इसकी शुरुआत डीआईजी शिमला अंजू आरा के स्वागत भाषण से हुई। बीआईएस परवाणू शाखा कार्यालय के प्रमुख एवं निदेशक एससी नायक ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताते हुए उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने और राज्य में गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन में बीआईएस तथा पुलिस की भूमिका पर प्रकाश डाला। बीआईएस परवाणू के वैज्ञानिक-ई एवं निदेशक शिव प्रकाश ने तकनीकी प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय मानक ब्यूरो की गतिविधियों और गुणवत्ता व्यवस्था में इसकी भूमिका समझाई।
उन्होंने आईएसआई चिह्न, एचयूआईडी के साथ आभूषणों की हॉलमार्किंग, अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों और असली आईएसआई चिह्नित उत्पादों की पहचान के बारे में जानकारी दी। साथ ही, नकली उत्पादों के विरुद्ध बीआईएस अधिनियम, 2016 के तहत की जाने वाली कार्रवाई की प्रक्रिया भी बताई। सत्र के दौरान पुलिस और सतर्कता अधिकारियों ने गैर-आईएसआई हेलमेट, प्रेशर कुकर, सीमेंट, स्टील और खिलौनों जैसे उत्पादों की पहचान को लेकर सवाल पूछे। डीजीपी अशोक तिवारी ने बीआईएस परवाणू शाखा कार्यालय की पहल की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्ता और सुरक्षा सीधे तौर पर जन सुरक्षा तथा उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी हैं। डीजीपी ने घटिया और मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पादों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में हिमाचल पुलिस की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया।