जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रमाणपत्र को बैकडेट से लागू दिखाया गया, जिससे परियोजना की स्थिति को कागजों में वास्तविकता से अलग दिखाया किया जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना में ठेकेदार को लगभग 13 करोड़ का अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमों को दरकिनार किया गया, जिससे विमल नेगी पर लगातार दबाव बना और वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गए थे। जिन अधिकारियों ने भुगतान और कंपनीशन को लेकर आपत्तियां दर्ज कीं, उन्हें निर्णय प्रक्रिया से अलग कर दिया गया। चार्जशीट के अनुसार परियोजना की निगरानी की जिम्मेदारियां बदली गईं और ऐसे अधिकारियों पर दबाव बनाया गया, जो नियमों के अनुरूप कार्रवाई की वकालत कर रहे थे।
सीबीआई ने अदालत को बताया है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों से अनुकूल टिप्पणियां और प्रस्ताव तैयार कराने का प्रयास किया गया। एजेंसी का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक निर्णयों का मामला नहीं बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य ठेकेदार के पक्ष में निर्णय सुनिश्चित करना था। जांच एजेंसी के अनुसार परियोजना से जुड़े दस्तावेजों, बैठकों के रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयानों से यह संकेत मिलता है कि नियमों को दरकिनार कर आधिकारिक रिकॉर्ड को अपने फायदे के अनुरूप ढालने की कोशिश की गई। इसी घटनाक्रम के दौरान बढ़ते दबाव और विवादों के केंद्र में रहे विमल नेगी की भूमिका भी जांच का अहम हिस्सा बनी हुई है। सीबीआई ने चार्जशीट में बताया है कि मामले में पद के दुरुपयोग, दस्तावेजों में गड़बड़ी और आपराधिक साजिश के सबूत स्पष्ट रूप से सामने आए हैं, जिनकी न्यायिक जांच अब अदालत में आगे बढ़ेगी।