मुख्यमंत्री पद के लिए वीरभद्र सिंह का नाम तय होने के बाद अब मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए कांग्रेस विधायकों में लाबिंग तेज हो गई है। एक ओर वीरभद्र समर्थक इस बार युवाओं को जगह मिलने के प्रति आशान्वित हैं तो दूसरी तरफ विरोधी खेमा मायूस है। अब हाईकमान के मार्फत पैरवी पर जोर है।
सोनिया गांधी के सोमवार से शुरू हो रहे विदेश दौरे के कारण हालांकि मंत्रिमंडल गठन में देरी हो सकती है। सोनिया का 29 दिसंबर को नई दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है। रविवार को वीरभद्र सिंह के साथ सुधीर शर्मा, मुकेश अग्निहोत्री और ठाकुर सिंह भरमौरी दिल्ली गए हैं, वे शपथ ग्रहण से कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे। कैबिनेट पर चर्चा के लिए वीरभद्र सिंह दोबारा दिल्ली जाएंगे। कांग्रेस सरकार की कैबिनेट में इस बार अनुभव और जोश का मिश्रण होगा। सबसे ज्यादा 10 सीटों के साथ कांग्रेस की सरकार बनाने वाले कांगड़ा को इस बार अहमियत मिलेगी।
मंडी संसदीय क्षेत्र से भी तीन कैबिनेट मंत्री हो सकते हैं। इनमें से दो चेहरे नए होंगे। वीरभद्र सिंह फिलहाल मंडी से सांसद हैं और उनके इस्तीफा देने के बाद यहां उपचुनाव संभावित है। 12वीं विधानसभा में कांग्रेस की ओर से सिर्फ दो महिलाएं विद्या स्टोक्स और आशा कुमारी जीतकर आई हैं। दोनों के ही मंत्री बनने की प्रबल संभावना है। कई दिग्गजों के हारने के कारण सुधीर शर्मा, मुकेश अग्निहोत्री, कर्ण सिंह, अनिल शर्मा, राजेश धर्माणी जैसे नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
मंडी में कौल सिंह, अनिल शर्मा और मनसाराम, चंबा में ठाकुर सिंह भरमौरी और कांगड़ा में सुजान सिंह पठानिया, जीएस बाली और बृज बिहारी लाल बुटेल, सोलन में धनीराम शांडिल, ऊना से कुलदीप कुमार आदि के नाम चर्चाओं में हैं। राज्य में 11 से ज्यादा कैबिनेट मंत्री नहीं हो सकते। इसलिए कुछ वरिष्ठ विधायकों को संसदीय सचिव भी बनाया जा सकता है।