सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट बेरोजगार युवा सीधे ए-क्लास के ठेकेदार बन सकेंगे। बी और सी श्रेणी का ठेकेदार बनने को सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा को पात्रता माना जाएगा।
यह व्यवस्था राज्य सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाए गए एनलिस्टमेंट नियमों में की गई है।
आईपीएच विभाग के प्रमुख अभियंता आरके शर्मा ने इसकी पुष्टि की है।
आईपीएच एनलिस्टमेंट रूल्स 2013 के मुताबिक हिमाचल मूल के बेरोजगार ने अगर सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ली है तो उसका ए-क्लास में सीधे पंजीकरण होगा।
ऐसे युवक को पंजीकरण के बाद 10 लाख तक के टेंडर को अर्नेस्ट मनी जमा नहीं करना होगा।
10 लाख से अधिक के कार्यों को ही अर्नेस्ट मनी जमा करना होगा। अन्य ठेकेदारों की तरह अर्नेस्ट मनी जमा करने पर 60 लाख तक के काम दिए जाएंगे।
इसके बाद ऐसे ठेकेदारों को 60 लाख तक के काम सफलता से करने पर किसी भी सीमा के ठेके लेने को अधिकृत किया जाएगा।
बी-क्लास में सिविल इंजीनियरिंग के अलावा दूसरी इंजीनियरिंग से स्नातक बेरोजगार युवा पात्र होंगे या फिर सिविल इंजीनियरिंग में तीन साल का डिप्लोमा भी पात्रता होगी।
ये बिना अर्नेस्ट मनी के 4 लाख तक के ठेकों के लिए अधिकृत होंगे। इससे ज्यादा के लिए इन्हें अर्नेस्ट मनी देना होगा। ये अधिकतम 40 लाख के ठेके ले पाएंगे।
अगर 40 लाख के ठेके में काम करवाने में ये सफल रहे तो इन्हें 1 करोड़ तक के ठेके मिल सकेंगे।
सी-क्लास को आर्किटेक्चर या सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा वाले बेरोजगारों को सीधे पंजीकृत करेंगे।
इन्हें 1.60 लाख तक के काम बिना अर्नेस्ट मनी के देंगे। ये अर्नेस्ट मनी के साथ 40 लाख तक के ठेके ले सकेंगे।
हालांकि, इन बेरोजगारों को अपनी अचल संपत्ति के राजस्व अधिकारी की ओर से पंजीकृत किए गए दस्तावेज जमा करने होंगे।
अगर इनके पास अचल संपत्ति नहीं हैं तो अपने परिजनों की लीगल श्योरिटी जमा करनी होगी।