आरोपी ने पीड़िता को इस घिनौनी हरकत की जानकारी किसी को भी देने पर उसे और उसके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। इसी डर के कारण पीड़िता चुप रही, लेकिन बाद में जब उसके गर्भवती होने का पता चला और उसने एक बच्चे को जन्म दिया, तब जाकर यह मामला पुलिस के संज्ञान में आया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 एवं 351(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उप जिला न्यायवादी नवीना राही ने अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। इस कानूनी प्रक्रिया में नायब कोर्ट यशपाल ने सहायक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष ने दोष सिद्धि के लिए अदालत के समक्ष 25 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करवाए। अदालत ने सभी साक्ष्यों, वैज्ञानिक प्रमाणों और गवाहों के बयानों का गहन अवलोकन करने के बाद आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।