ऊना। समाज में हम महिलाओं को बराबरी के हक देकर उन्हें सशक्त करना चाहते हैं तो पुरुषों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है।
साफ है कि हमारा समाज महिलाओं और पुरुषों दोनों से चल रहा है। ऐसे में इस मुहिम में दोनों वर्ग की बराबर सहभागिता होना आवश्यक है। यह बात डीआरडीए की परियोजना अधिकारी शैफाली ने कही। वह शिक्षा भारती शिक्षण संस्थान समूर कलां में आयोजित अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भाग ले रहीं थीं।
परियोजना अधिकारी ने कहा कि युवा ही हमारे देश का भविष्य है। संविधान में हर किसी को मूल अधिकार दिए हैं। जिन्हें उनसे कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो उसे सीधे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। कहा कि 24 जनवरी का दिन बालिका दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। बच्चियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न हो और उन्हें समाज में आगे बढ़ने का मौका देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। शैफाली ने कहा कि यह समाज पुरुषों और महिलाओं के कंधे से कंधा मिलाकर ही आगे बढ़ रहा है। लेकिन यह देखने में आता है कि राजनीतिक, सरकारी नौकरी व आत्मनिर्भरता में महिलाएं आज भी बहुत पीछे हैं। आज भी बहुत कम महिला अधिकारी हैं। कहा कि प्रदेश में मात्र एक विधायक महिला है। यह स्थिति ठीक नहीं है। परियोजना अधिकारी ने कहा कि महिलाओं को 100 लोगों के मध्य अपनी आवाज रखनी होगी। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि आप रोजगार या राजनीति के क्षेत्र में अपनी बात रखें। अगर आप गृहिणी भी हैं तो किसी भी मामले में अपनी राय जरूर रखें। जब चार लोग आपकी बात सुनेंगे, तभी से महिला सशक्तिकरण की शुरुआत होगी।
बॉक्स
अपने वोट का महत्व समझें
शैफाली ने कहा कि चुनावों में भी देखा जाता है कि महिलाएं वहीं वोट डालती हैं, जहां परिवार वाले बोलते हैं। कहा कि आपके पास अपनी समझ हैं। सभी लड़कियां पढ़ी लिखी हैं। आपके वोट का बहुत महत्व हैं। इसे व्यर्थ न गंवाएं। उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देश में महिलाओं को अपने मताधिकार के लिए लड़ना पड़ा था। हमारे देश में पहले से यह हक महिलाओं को दिया गया है। ऐसे में इसका सोच समझकर काबिल प्रत्याशी के लिए इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के उत्थान के लिए सरकार ने कई योजनाओं को शुरू किया है।
प्रबंधन ने सराहे फाउंडेशन के प्रयास
कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान प्रबंधन ने परियोजना अधिकारी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। जिसके बाद संस्थान के इंचार्ज हंसराज ने मंच का संचालन करते हुए कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से यह एक शानदार अभियान चलाया गया है। उन्होंने कहा कि उनके संस्थान में अधिकतर प्रशिक्षु महिला वर्ग से ही हैं। इस कार्यक्रम का उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा और नई जानकारियां सीखने को मिलेंगी। इस दौरान हंसराज ने शेरो शायरी से भी समां बांधा और खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर डीआरडीओ ऊना की वरिष्ठ सहायक रंजना बख्शी, कालेज स्टाफ से बख्शो देवी, राकेश चंद, रविकांत, वरिंद्र कुमार, दीक्षा शर्मा, भारती, प्रतिभा उपस्थित रहे।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें : शिवांगी
बीएड प्रथम वर्ष की प्रशिक्षु शिवांगी ठाकुर ने पूछा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी किस प्रकार करें ताकि सफलता हासिल हो जाए। इस पर डीआरडीए परियोजना अधिकारी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करना मुश्किल नहीं है। अनुशासन के साथ मेहनत बहुत जरूरी है। कहा कि परीक्षाएं देने वाले विद्यार्थियों में बेहद कम ऐसे होते हैं जिन्होंने गंभीरता से तैयारी की होती है। आज नहीं तो कल मेहनत करने वालों को सफलता मिल ही जाती है।
आसपास कुछ गलत हो रहा तो कैसे रोकें: तमन्ना
बीएड प्रथम वर्ष की प्रशिक्षु तमन्ना ने कहा कि कई बार आंखों के सामने महिलाओं के साथ गलत होता दिखता है तो उसे कैसे रोक सकते हैं। इसपर परियोजना अधिकारी ने कहा कि अगर कोई गैर कानूनी कार्य होता तो पुलिस को सूचित करें। आजकल कई टोल फ्री नंबर महिलाओं की सुरक्षा के लिए जारी किए गए हैं। इसमें जानकारी देने वाले का नाम भी गुप्त रखा जाता हैं।
परीक्षाओं में कैसी हो मानसिक स्थितिः कनिका
जेबीटी प्रशिक्षु कनिका ने सवाल किया कि बड़ी परीक्षाओं को लेकर कैसी मानसिक स्थिति के साथ तैयारी करें। इस पर शैफाली ने कहा कि हमेशा बड़ा सोचें। पूरी लगन के साथ पढ़ाई करें। आसपास का माहौल सकारात्मक रखें। नकारात्मक विचार रखने वालों से दूरी बना लें।
आजादी के इतने वर्ष बाद भी भेदभाव क्यों : कंचन
जेबीटी प्रशिक्षु कंचन ने कहा कि हमारे देश को आजाद हुए करीब 76 साल बीत चुके हैं। आज भी लड़कियों को अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है। ऐसी स्थिति क्यों है। इस पर परियोजना अधिकारी ने कहा कि महिलाओं का शिक्षित होना और अपने हकों के बारे जानना बेहद जरूरी है। कहा कि पहले महिलाओं को पढ़ाई का मौका ही नहीं मिलता था। लेकिन अब स्थिति बहुत बदली है। भविष्य में तस्वीर और साफ होगी। इसके लिए हमें खुद आवाज उठानी होगी।
-