महिलाएं अधिकारों को पहचानें और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएं : श्याम दुलारी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। पीएनबी आरसेटी ऊना में शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता जिला परिषद की अध्यक्ष नीलम कुमारी ने की। इस दौरान महिला प्रशिक्षुओं ने अमर उजाला के मंच पर अपने विचार साझा किए। अध्यक्ष नीलम कुमारी ने कहा कि अभी भी महिलाओं को सशक्त करने के लिए बहुत काम जरूरी है। भले ही सरकार ने महिलाओं का उत्थान करने के लिए कई कल्याणकारी योजना शुरू की हैं लेकिन समाज में अभी भी महिलाओं के प्रति जो लोगों का नजरिया है वह बदल नहीं पाया है। महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे है। कंधे से कंधा मिलाकर समाज में अपना बहुमूल्य योगदान दे रही हैं लेकिन समाज में लोगों की संकीर्ण मानसिकता के चलते अभी भी महिलाएं उत्पीड़न का शिकार होकर रह गई हैं। जब तक महिलाएं अपने साथ हो रहे अत्याचार को दूर करने के लिए आवाज बुलंद नहीं करेंगी तब तक सही मायने में उनका सशक्तीकरण नहीं हो पाएगा। समाज सेवी एवं अधिवक्ता श्याम दुलारी ने कहा कि महिलाएं अपने अधिकारों को पहचाने और अपने साथ हो रहे उत्पीड़न को सहन न करके इसके प्रति आवाज़ उठाएं। अगर उत्पीड़न को सहन कर रही हैं तो महिलाएं दब कर रह जाएंगी। पीएनबी आरसेटी के समन्वयक आकाश भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। नेहरू युवा केंद्र के जिला युवा अधिकारी प्रदीप कुमार ने कहा कि अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम से महिलाओं को अपनी आवाज उठाने के लिए मंच मिला है। सोमभद्र संस्था की जिला प्रधान मीना ठाकुर ने कहा कि कार्यक्रम में महिलाओं ने विभिन्न प्रकार की कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की है।
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कोई भी काम करने के लिए महिलाओं के भीतर जुनून होना चाहिए। तभी हर काम सहजता से किया जा सकता है। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम से महिलाओं को अपनी आवाज उठाने का अवसर मिला है। -पौंटा की प्रशिक्षु महिला नीलम
आज के दौर में भी जब कोई हारी हुई महिला आगे बढ़ना चाहती है तो महिलाएं ही उनको पीछे धकेलने में लगी हैं। ऐसे में महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव आना जरूरी है। -रेखा तोमर
आगे बढ़ने वाली महिलाओं के प्रति समाज में संकीर्ण सोच रखने वाले लोग विचार भी वैसे ही रखते हैं जो गलत है। बदलते परिवेश के हिसाब से सबको महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी। -अंजना ठाकुर
बेटियों को बेटों के मुकाबले पीछे रखा जाता है। पढ़ाई लिखाई से लेकर अन्य बातों में भी भेदभाव रखा जाता है। चाहे बाद में परिणाम विपरीत आएं। महिलाओं को सशक्त करने के लिए ऐसी सोच बदलनी होगी। -ममता
आज भी समाज में बेटियों के मुकाबले परिजन बेटों की चाहत रखते हैं। जब तक बेटा-बेटी का भेदभाव खत्म नहीं होगा, महिलाओं के प्रति सोच नहीं बदलेगी। आज महिलाएं हर मोर्चे पर आगे हैं। -पूजा
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में महिलाओं को अपने विचार रखने का अवसर मिला। इस तरह के कार्यक्रमों से महिलाओं के मनोबल में वृद्धि होती है और सोच में बदलाव आता है। -सुनीता