दुलैहड़ (ऊना)। जिले में लंबे अरसे से बारिश न होने से गेहूं की फसल पीला रतुआ की चपेट में आ गई है। इससे किसान चिंतित हैं।
यदि एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो कृषि को भारी क्षति पहुंचेगी। वहीं सिंचित क्षेत्रों में पैदावार 25 से 30 फीसदी कम होने की आशंका जताई जा रही है। वर्षा न होने से हरे भरे खेत पीले पड़ गए हैं।
हरोली के दुलैहड़, पंजावर, बढेड़ा के ईसपुर में गेहूं की फसल पर पीला रतुआ का प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। दुलैहड़ के किसानों में नूर मोहम्मद, यशपाल, लखविंद्र, रविंद्र कुमार, होशियार सैणी, प्यारा लाल शर्मा, जगतार सिंह, मुख्तयार सिंह सैणी, सतीश, परमजीत व मंगतराम का कहना है कि क्षेत्र के किसान लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बारिश न होने से किसानों की आजीविका का मुख्य साधन गेहूं की फसल पीला रतुआ की चपेट में आ रही है। इससे किसानों के माथे पर चिंता लकीरें हैं।
बढेड़ा के किसानों में देव सैणी, लवली कुमार, विजय कुमार, प्यारा लाल, रमेश कुमार, पवन कुमार सैणी आदि ने बताया कि उनके खेतों में गेहूं की फसल के पौधों के पत्ते पीले पड़ रहे हैं और उन पीले पत्तों से पीला सा पाउडर नीचे गिर रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द बारिश नहीं हुई तो पीला रतुआ बीमारी से गेहूं फसल को लाखों का घाटा होगा। पंजावर के किसान राम कुमार शर्मा, कमल किशोर, सौरव सैणी व महेश कुमार ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल पीला रतुआ की चपेट में आने से उन्हें भारी परेशान का सामना करना पड़ रहा है।
टिलट दवा का करें छिड़काव : मेहता
जिला कृषि अधिकारी डॉ. एचएस मेहता ने कहा कि फसल पर पीला रतुआ के लक्षण दिखते ही किसान प्रोपिकोनाजोल 25 इसी. का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करें, जबकि दूसरा छिड़काव 15-20 दिन के बाद करें। उन्होंने बताया कि एक कनाल के लिए 30 मिली दवा 30 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
छिड़काव के दौरान बरतें सावधानी
पीला रतुआ से प्रभावित फसल में दवा का छिड़काव सबसे बाद में करें और जो फसल अभी रोग से ग्रस्त नहीं है, उसे पहले दवाई का छिड़काव करें। यदि पहले रोग ग्रस्त फसल को दवाई का छिड़काव किया तो आपके पैरों के साथ बीमारी बची खुची फसल में भी पहुंच सकती है, इसलिए छिड़काव से पहले किसान सावधानी जरूर बरतें।