ऊना में बारिश के बाद आलू के खेतों में खड़ा पानी। संवाद
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ऊना। क्षेत्र में पिछले सप्ताह छह दिन लगातार हुई बारिश की मार आलू की फसल पर पड़ी है। इस समय क्षेत्र के कई हिस्सों में आलू के खेतों में पानी जमा हुआ है। निकासी की व्यवस्था न होने के कारण आलू का बीज अब सड़ने लगा है। हालांकि, जिन खेतों में निकासी की व्यवस्था है, वहां आलू की फसल पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है।
पिछले सप्ताह हुई लगातार बारिश से क्षेत्र में 10 फीसदी आलू की फसल खराब हो चुकी है। इस फसल के खराब होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला में पिछले सप्ताह 138.4 मिलीमीटर बारिश हुई। इस वजह से क्षेत्र के अधिकतर खेतों में पानी जमा हो गया। जिन खेतों में पानी की निकासी की व्यवस्था थी वहां तो किसानों ने समय रहते पानी निकलवा दिया। वहीं कुछ खेत ऐसे भी हैं जहां पानी बाहर निकालने की व्यवस्था नहीं है। उन खेतों में बारिश के दो दिन बाद मंगलवार को भी पानी खड़ा है।
इन खेतों में फसल का खराब होना तय है। जिला में आलू की चार महीने वाली फसल करीब पांच सौ से छह सौ हेक्टेयर जमीन पर उगाई जाती है। इसके लिए किसानों बिजाई दिसंबर माह के अंत में शुरू की और 15 जनवरी तक आलू की पत्तियां जमीन से बाहर आना शुरू होती हैं। इससे पहले चार से नौ जनवरी तक लगातार मूसलाधार बारिश हुई। किसानों के लिए राहत लेकर आई बारिश धीरे-धीरे आफत बन गई। कई खेतों में पानी लबालब भर गया। ध्यान रहे कि इससे पहले सितंबर से नवंबर माह के बीच उगाई जाने वाले आलू की दो महीने वाली फसल पर भी मौसम की मार पड़ी थी।
इस दौरान असमायिक बारिश होने से आलू के उत्पादन में 30 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद अब आलू की चार महीने वाली फसल पर भी बारिश की मार पड़ी है। किसानों के लिए यह दोहरा झटका माना जा रहा है। इस संबंध में उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. अतुल डोगरा ने बताया कि फसलों के लिए शुरूआती दो से तीन दिन की मूसलाधार बारिश काफी थी। लेकिन, लगातार छह दिन हुई बारिश के कुछेक क्षेत्रों में नुकसान पहुंचाया है। जिन खेतों में पानी की निकासी नहीं थी, वहां अधिक नुकसान पहुंचा है।