बड़ूही (ऊना )। कृषि क्षेत्र में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरे की घंटी है। किसानों द्वारा रासायनिक खाद का अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहै है जिससे मिट्टी की उर्वरकता कम हो रही है और जल स्रोतों में भी इनकी मौजूदगी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अत्यधिक उपयोग से जड़ी-बूटियों और कीटों में प्रतिरोधी क्षमता बढ़ रही है। जिससे इनकी प्रभावशीलता कम हो रही है। इसके साथ ही रासायनिक तत्वों का मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। जिसमें कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पेश आ रही हैं। आम जनमानस ने इस समस्या पर गहरी चिंता जताई है। बाजार में हर चीज आसानी से बेमौसमी उपलब्ध हो रही है। यह सब दवाइयों का कमाल है। लोगों और पर्यावरणविद संगठनों ने सरकार से अपील की है कि इस पर कड़े कदम उठाए जाएं।
कम खाद और कीटनाशकों का उपयोग करें किसान : कृषि अधिकारी
ब्लॉक अंब कृषि अधिकारी सूरज का कहना है कि किसानों को कम से कम खाद और कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए। हम लोगों को बताते हैं कि यूरिया खाद तीन किलो प्रति कनाल के हिसाब से उपयोग करना चाहिए। लोगों को जैविक कृषि की ओर प्रेरित किया जा रहा है।
जैविक खेती को अपनाएं : संदीप
चुरुडू के किसान संदीप ठाकुर का कहना है कि लोगों को कम से कम रासायनिक खाद और कीटनाशक का उपयोग करना चाहिए और धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर आना चाहिए ताकि हम अपनी भविष्य की पीढ़ी को सेफ कर सकें।
मुर्गे की खाद पर भी प्रतिबंध लगे : उपप्रधान
टकारला के उपप्रधान राजीव शर्मा का कहना है कि लोगों को खाद और कीटनाशकों का काम से कम उपयोग करना चाहिए और साथ में मुर्गे की खाद पर भी प्रतिबंध लगाना चाहिए। राजीव ने कहा कि टकारला पंचायत की बात करें तो यहां गंभीर स्थिति बन गई है। पिछले कुछ वर्षों से कैंसर के मरीज बढ़े हैं।
लोग देसी चीजें तैयार करें : संजीव
बड़ूही से संजीव धीमान का कहना है कि लोगों को अपनी देसी चीजें तैयार करनी चाहिए। देसी सब्जियां पौष्टिक होती हैं और बाजार से ली हुई सब्जी और अपने खेतों में तैयार की गई जैविक सब्जी के टेस्ट में भी फर्क होता है। लोगों को अंग्रेजी दवाइयों और रासायनिक खाद से बचना चाहिए।