ऊना। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि निजी स्कूल प्रबंधनों द्वारा वार्षिक शुल्क अधिक लेने के मामलों में अभिभावकों को पहले अपनी शिकायत स्थानीय स्कूल प्रबंधन कमेटी (एसएमसी) के पास देनी होगा। यहां मामला न सुलझने पर विभाग आगामी कार्रवाई अमल में लाएगा।
अभिभावकों की शिक्षा विभाग के पास लगातार शिकायतें आ रही हैं कि निजी स्कूल प्रबंधन उनके बच्चों के वार्षिक शुल्क और फंडों की भारी मात्रा में मांग कर रहे हैं। जिसे देने में अभिभावक वर्ग असमर्थता जाहिर कर रहा है। अभिभावक भारी भरकम फीस की बजाय मात्र ट्यूशन फीस लेने का आग्रह कर रहे हैं जबकि निजी स्कूल वार्षिक शुल्क ले रहे हैं। इसी वार्षिक शुल्क के चलते रोजाना शिकायतें डीसी व शिक्षा विभाग के पास पहुंच रही हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभिभावक वार्षिक शुल्क, फीस व फंड की शिकायतों को पहले स्कूलों की एसएमसी के पास दें। यहां मामला सुलझ जाता है तो बेहतर है। यदि मामला नहीं सुलझता है तो इसके बाद ही शिक्षा विभाग के पास पहुंचें। यदि कोई सीधे विभाग को शिकायत करता है तो उसे भी यह मामला पहले एसएमसी में ही उठाने के लिए भेजा जाएगा।
कार्रवाई न करने पर होगी मान्यता रद्द : राणा
उच्च शिक्षा उपनिदेशक पीसी राणा ने कहा कि अगर निजी स्कूल प्रबंधन कमेटी अभिभावकों की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करती है तो शिक्षा विभाग उक्त स्कूल की मान्यता भी रद्द कर सकता है। निजी स्कूलों की एसएमसी को अभिभावकों की शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए। निजी स्कूल प्रबंधन प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित की गई फीस और फंड ही लें।