ऊना। गुरुओं व धार्मिक डेरों की धरती ऊना में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिष्यों ने गुरुओं को नमन कर आशीर्वाद लिया और धार्मिक स्थलों पर शीश नवाया। रविवार तड़के से श्रद्धालु धार्मिक स्थलों में पहुंचना शुरू हो गए।
श्री राधा कृष्ण मंदिर कोटला कलां, डेरा बाबा रुद्रानंद नारी और शिवालयों में हजारों श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। श्रद्धालुओं ने गुरु दर्शन के बाद भंडारे का आनंद लिया। जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से साथ लगते प्रसिद्ध राधा-कृष्ण मंदिर कोटला कलां में रविवार को श्रद्धा और आस्था का सैलाब देखने को मिला। श्री राधा-कृष्ण मंदिर में विभिन्न इलाकों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज की विधिवत पूजा-अर्चना की और शीश नवाया।
वहीं, डेरा बाबा रुद्रानंद महाराज नारी में भी सुबह पांच बजे से श्रद्धालु आना शुरू हो गए। इसके बाद सुबह 10 बजे तक डेरे में गुरु दर्शनों के लिए करीब दो किलोमीटर तक लंबी कतार लग गई। इस दौरान श्रद्धालुओं के सुबह से नाश्ते के साथ दोपहर को भंडारे की व्यवस्था भी की गई।
इसी प्रकार महादेव मंदिर कोटला कलां, बनौड़े महादेव मंदिर, ध्यूंसर महादेव सदाशिव मंदिर, शिवबाड़ी मंदिर गगरेट सहित अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचे। इस दौरान दिनभर भक्तों की रौनक लगी रही।
महर्षि वेदव्यास को प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त
ध्यान रहे कि गुरु पूर्णिमा का त्योहार हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूजन भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के ही दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। सनातन धर्म में महर्षि वेदव्यास को प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि सबसे पहले मनुष्य जाति को वेदों की शिक्षा उन्होंने ही दी थी। इसके अलावा महर्षि वेदव्यास को श्रीमद्भागवत, महाभारत, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा के अलावा 18 पुराणों का रचियाता माना जाता है।