टाहलीवाल (ऊना)। पंचायत चुनाव के बीच चुनावी खर्च को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। गांव स्तर पर प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, बीडीसी और जिला परिषद जैसे पदों के लिए उम्मीदवार मैदान में हैं। इस बार चुनाव में बढ़ते खर्च ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आम लोगों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव अब केवल जनसेवा तक सीमित नहीं रह गए बल्कि कई जगह इन्हें निवेश की तरह देखा जाने लगा है। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार कई उम्मीदवार अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने की तैयारी में हैं। राजनीतिक जानकारों का अनुमान है कि प्रधान पद के चुनाव में लाखों रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं जबकि बीडीसी और जिला परिषद जैसे चुनावों में यह आंकड़ा और अधिक हो सकता है। यहां तक कि वार्ड सदस्य के चुनाव भी अब खर्चीले होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब चुनावों में भारी पैसा लगाया जाता है तो जीत के बाद उसकी भरपाई का दबाव भी बढ़ जाता है। ऐसे में विकास कार्यों की पारदर्शिता प्रभावित होने और योजनाओं में अनियमितताओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है कि आचार संहिता के उल्लंघन या अवैध खर्च की शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। वहीं जागरूक नागरिकों का मानना है कि पंचायत चुनावों में बढ़ता धन बल लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो पंचायत राजनीति भी पूरी तरह पैसों के प्रभाव में आ सकती है।
इधर जिला प्रशासन ऊना और पुलिस विभाग चुनावों को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। उड़नदस्ते और निगरानी टीमें लगातार सक्रिय हैं तथा संदिग्ध गतिविधियों और लेन-देन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। विभिन्न विभाग आपसी समन्वय के साथ चुनाव प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।