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ज्ञान का फल ही भक्ति, नाम जप और कीर्तन हैं साधन : अतुल कृष्ण

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अंब (ऊना)। उपमंडल अंब के तहत ज्वार स्थित कम्युनिटी सेंटर में कथा महोत्सव का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ किया गया। समापन सत्र में भागवताचार्य अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि ज्ञान का वास्तविक फल भक्ति है। जब ज्ञान का उदय होता है तो उसकी अभिव्यक्ति भक्ति के रूप में स्वत प्रकट होती है। नाम जप और कीर्तन भक्ति को पुष्ट करने के साधन हैं।
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उन्हाेंने कहा कि जिस प्रकार वृक्ष में जल डालने से फल प्राप्त होता है, उसी प्रकार नाम स्मरण और भक्ति रूपी साधन जीवन में आध्यात्मिक फल देते हैं। धर्म ही उन्नति और सफलता की नींव है।
उन्होंने जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्यों को समझाते हुए कहा कि इच्छाएं शेष रह जाएं और शरीर समाप्त हो जाए, वही मृत्यु है, जबकि शरीर रहते हुए इच्छाओं का अंत हो जाना ही मोक्ष की अवस्था है। पुनर्जन्म केवल मृतक का होता है, मुक्त आत्मा का नहीं।
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ईश्वर की स्मृति में ही सच्चा सुख निहित है। व्यक्ति अमीर हो या गरीब, उच्च पद पर हो या सामान्य जीवन जी रहा हो। मृत्यु सभी के लिए समान है। प्रभु की निर्मल भक्ति ही मनुष्य को इस जन्म-मरण के चक्र से पार लगाती है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने शबरी, हनुमान, रामानुजाचार्य, रामानंदाचार्य, निंबार्काचार्य, वल्लभाचार्य तथा आदि शंकराचार्य जैसे महान संतों और भक्तों के प्रेरणादायक चरित्रों का भावपूर्ण श्रवण किया। कार्यक्रम में कई आकर्षक झाकियां निकालीं और भंडारे का आयोजन भी किया गया।
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