आसपास बिखरे प्रतिबंधित लिफाफों से पवित्र जल में बढ़ रहा प्रदूषण
संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। गगरेट क्षेत्र की ऐतिहासिक स्वां नदी (सोमभद्रा) में तैरती मां की मूर्ति ने जहां श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, वहीं नदी के आसपास बिखरे प्रतिबंधित मोमी लिफाफे पवित्र जल में बढ़ते प्रदूषण की पोल खोल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति तब पैदा हो रही है जब घर और मंदिरों में की गई पूजा एवं हवन की सामग्री को बिना सोच-विचार के नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। इससे न केवल नदी का पवित्र स्वरूप प्रभावित हो रहा है, बल्कि पानी भी प्रदूषित हो रहा है। इस तरफ न तो प्रशासन का ध्यान जा रहा है और न ही समाज के जागरूक लोगों का। समय रहते उचित कदम न उठाए गए तो स्वां नदी में कचरा भर जाएगा।
इस संबंध में क्षेत्र के ज्योतिषी
पंडित विनोद कुमार ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त सामग्री को नदी में बहाने के बजाय जमीन में दबा देना अधिक उचित होगा। इससे न तो किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचेगी और न ही पवित्र नदी में प्रदूषण फैलेगा।
ग्राम पंचायत घनारी के पूर्व प्रधान ओम प्रकाश ने कहा कि लोगों में इतनी समझ होनी चाहिए कि वे स्वयं ऐसा न करें, लेकिन आज व्यक्ति तभी मानता है जब सरकार इस पर रोक लगाने की पहल करे। इसे रोकने के लिए समाज को आगे आना होगा।
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स्वां नदी क्षेत्र का उचित संरक्षण न कर पाना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए समाज को स्वयं आगे आना होगा। -दर्शप्रीत योगेश्वर शिव मंदिर के पुजारी मुकेश मिश्रा
प्रशासन को चाहिए कि स्वां नदी में कचरा, धार्मिक सामग्री और प्रतिबंधित वस्तुएं फेंकने पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि स्वां नदी का स्वच्छ और पवित्र स्वरूप बना रहे। -समाजसेवी अशोक वशिष्ठ